मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर 3 नवंबर को होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस और बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. सूबे की आधा दर्जन सीटों पर खास नजर है, जहां 2018 विधानसभा चुनाव में कांटे की लड़ाई रही है. इन सीटों पर जीत-हार का अंतर 10 हजार से कम वोटों का रहा है. हालांकि, दो साल पहले बड़ी मुश्किल से जीते कांग्रेसी विधायक अब बीजेपी का दामन थामकर मैदान में हैं, जिसके चलते यहां की सियासी जंग काफी रोचक हो गई है.
सांवेर: कांटे का मुकाबला
इंदौर जिले की सांवेर सीट पर पूरे प्रदेश की निगाहें लगी हुई हैं. यहां कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए शिवराज सरकार के मंत्री तुलसीराम सिलावट मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस ने पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू को उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है. 2018 के चुनाव में तुलसीराम सिलावट महज 2,945 वोटों से जीत सके थे, जिसते चलते इस बार उनकी सीट पर कांटे की लड़ाई मानी जा रही है. यही वजह है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पांच रैलियां और ज्योतिरादित्य सिंधिया सांवेर में तीन जनसभाएं कर चुके हैं. वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में कमलनाथ दो रैलियों को संबोधित कर चुके हैं.
अशोकनगर: जज्जी बनाम दोहरे
अशोकनगर विधानसभा सीट पर कांग्रेस छोड़कर बीजेपी से चुनावी मैदान में उतरे जजपाल सिंह जज्जी को काफी कड़ी चुनौती मिल रही है. जज्जी के खिलाफ कांग्रेस से चुनाव लड़ रही आशा दोहरे दलबदल को मुद्दा बनाने में जुटी हैं. 2018 के चुनाव में जजपाल सिंह जज्जी ने बीजेपी के लद्दाराम कोरी को महज 9,730 वोटों से मात देकर विधानसभा पहुंचे थे, लेकिन इस बार समीकरण बदले हुए हैं. ऐसे में बीजेपी को भितरघात का भी खतरा बना हुआ है, जिससे के चलते जज्जी के लिए यह सीट काफी चुनौतीपूर्ण बन गई.
मुंगावली: यादव बनाम लोधी
गूना का मुंगावली विधानसभा सीट पर कांग्रेस से दो बार विधायक रह चुके ब्रजेंद्र सिंह यादव इस बार भाजपा से भाग्य आजमा रहे हैं. यादव बहुल माने जाने वाली इस सीट पर उनका मुकाबला कांग्रेस के कन्हई राम लोधी से है. 2018 के चुनाव में ब्रजेंद्र सिंह यादव ने बीजेपी के कृष्णपाल सिंह यादव को महज 2136 वोटों से हराया था. हालांकि, इस बार बीजेपी के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरने से ब्रजेंद्र की सीट फंसी हुई नजर आ रही है, क्योंकि मौजूदा सांसद केपी यादव अभी तक उनके लिए वोट मांगते नजर नहीं आए हैं.
अंबाह: नरेंद्र तोमर की प्रतिष्ठा दांव पर
मुरैना जिली की अंबाह विधानसभा सीट पर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की साख दांव पर लगी है. यहां से कांग्रेस छोड़कर बीजेपी से चुनाव मैदान में उतरे कमलनेश जाटव के लिए निर्दलीय अभिनय छारी मुसीबत का सबब बने हुए हैं. यही नहीं बसपा से आए सत्यप्रकाश सखवार को कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है. 2018 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर कमलेश जाटव ने 7,547 मतों से जीत दर्ज की थी. यह सीट सखवार बहुल मानी जाती है और कांग्रेस ने इसी समाज पर दांव खेला है.
सुवासरा: हरदीप के सामने पाटीदार
मध्य प्रदेश के मंदसौर के सुवासरा से दो बार कांग्रेस से विधायक रहे चुके हरदीप सिंह डांग बीजेपी के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं. डांग के खिलाफ कांग्रेस से किसान नेता राकेश पाटीदार ताल ठोक रहे हैं. 2018 के चुनावों में हरदीप ने सुवासरा सीट पर महज 350 वोटों के अतंर से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार के बदले हुए समीकरण में पाटीदार एक बड़ी चुनौती बन गए हैं.
पोहरी: सुरेश धाकड़ के सामने कड़ी चुनौती
सुरेश धाकड़ ने सरपंच का चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी. पोहरी सीट पर कांग्रेस का दामन छोड़कर बीजेपी से सुरेश धाकड़ चुनावी मैदान में उतरे हैं, जिनके खिलाफ कांग्रेस ने ब्राह्मण कैंडिडेट हरिवल्लभ शुक्ल को उतारकर मुकाबले के रोचक बना दिया है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समाज से धाकड़ आते हैं, लिहाजा सीएम समाज के प्रत्याशी को जितवाने के लिए चार सभाएं कर चुके हैं. हालांकि, 2018 के चुनाव में शिवपुरी जिले की पोहरी सीट से वो कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर 7,918 वोटों के अंतर से जीत हासिल कर पहली बार विधायक बने थे, लेकिन अब बीजेपी के प्रत्याशी के तौर पर हैं.