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मध्य प्रदेशः 'अपनों' को टिकट देने में कांग्रेस से आगे निकली BJP

पार्टी विद डिफरेंस का दावा करने वाली बीजेपी भी वंशवाद से अगल करके नहीं देखा जा सकता है. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पहली सूची सामने आने के बाद बीजेपी में वंशवाद की बेल ज्यादा लंबी दिखाई दे रही है.

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मध्य प्रदेश चुनाव (फोटो-Reuters)
मध्य प्रदेश चुनाव (फोटो-Reuters)

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भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है. वंशवाद की जनक माने जाने वाली कांग्रेस में तो अपनों को टिकट मिला ही, लेकिन पार्टी विद डिफरेंस का दावा करने वाली बीजेपी भी वंशवाद से अछूती नहीं रही. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पहली सूची सामने आने के बाद बीजेपी में वंशवाद की बेल ज्यादा लंबी दिखाई दे रही है.

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस की पहली सूची में वंशवाद साफतौर पर देखने को मिला है. बीजेपी के 177 और कांग्रेस के 155 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी हो चुकी है. दोनों ही राजनीतिक दल टिकट वितरण में पार्टी के सर्वे को प्राथमिकता की बात कर रहे थे, लेकिन पहली सूची में दावों के उलट वंशवाद जमकर चला है.

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सबसे पहले बात कांग्रेस की करते हैं जिन पर वंशवाद का आरोप हमेशा से ही लगते रहे हैं. इस चुनाव में ही उसकी छाप साफतौर पर दिख रही है. कई बड़े नेताओं के 'अपनों' को कांग्रेस ने टिकट दिया है.

कांग्रेस में इन नेताओं के रिश्तेदारों को मिले टिकट

-दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह

-दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह

-दिग्विजय सिंह के भतीजे प्रियव्रत सिंह

-सत्यदेव कटारे के बेटे हेमंत कटारे

-हजारीलाल रघुवंशी के बेटे ओम प्रकाश रघुवंशी

-अरुण यादव के भाई सचिन यादव

-सत्यव्रत चतुर्वेदी के भाई आलोक चतुर्वेदी

- सुंदरलाल तिवारी की बहू अरुणा तिवारी

- इंद्रजीत पटेल के बेटे कमलेश्वर पटेल

- कांतिलाल भूरिया के बेटे विक्रांत भूरिया

- कांतिलाल भूरिया की भतीजी कलावती भूरिया

- जमुनादेवी का भतीजा उमंग    

बीजेपी में वंशवाद की सूची लंबी

वंशवाद के मुद्दे पर कांग्रेस को पानी पी पीकर कोसने वाली बीजेपी भी इससे अछूती नहीं है. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए जारी बीजेपी की पहली सूची में कई नेता पुत्रों या अपनों को टिकट दिया गया है जिसकी लिस्ट कांग्रेस से ज्यादा बड़ी है.

-पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे और मंत्री सुरेंद्र पटवा

-पूर्व सांसद कैलाश सारंग के बेटे मंत्री विश्वास सारंग

-पूर्व सांसद कैलाश जोशी के बेटे और मंत्री दीपक जोशी

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-वन मंत्री गौरीशंकर शेजवार के बेटे मुदित शेजवार

-मंत्री हर्ष सिंह के बेटे विक्रम सिंह

-आरडी प्रजापति के बेटे राकेश प्रजापति

-लक्ष्मीकांत शर्मा के भाई उमाकांत

-सांसद लक्ष्मी नारायण यादव के बेटे सुधीर यादव

-पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी के बेटे अशोक रोहाणी

-केंद्रीय मंत्री उमा भारती के भतीजे राहुल लोधी

-बीजेपी नेता विजय खंडेलवाल के पुत्र हेमंत खंडेलवाल

-पूर्व मंत्री तुकोजीराव पवार की पत्नी गायत्री राजे पवार

-पूर्व केंद्रीय मंत्री विक्रम वर्मा की पत्नी नीता वर्मा

-पूर्व मुख्यमंत्री वीरेंद्र सकलेचा के पुत्र ओमप्रकाश सकलेचा

-पूर्व केंद्रीय मंत्री पहलाद पटेल के भाई जालम सिंह पटेल

-पूर्व सांसद लक्ष्मीनारायण पांडे के पुत्र राजेंद्र पांडे

यही नहीं, बीजेपी और कांग्रेस दोनों की पहली सूची में वंशवाद की झलक है. लेकिन एक दूसरे पर आरोप लगाते हुए दोनों ही राजनीतिक दल हास्यास्पद तरीके से खुद को वंशवाद से दूर बता रहे हैं. बहरहाल, इतना ज़रूर साफ है कि चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने टिकट देने से पहले बातें तो बहुत की, लेकिन जब टिकट देने की बारी आई तो कुनबे का मोह नहीं छोड़ पाए.

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