राघौगढ़ गुना जिले के अंतर्गत आने वाली 4 विधानसभा सीटों में से एक है. यह सीट राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. इस सीट पर एक ही परिवार का राज रहा है. कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह और उनका परिवार ही इस सीट पर राज करते आया है. अगर कहें तो यहां पर सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस की ही जीत होती रही है तो गलत नहीं होगा.
दिग्विजय सिंह को यहां के लोग राजा साहेब, दरबार, दिग्गी राजा या हुकुम के नाम से पुकारते हैं जबकि उनके छोटे भाई लक्ष्मण सिंह को छोटे साहब कहा जाता है. दिग्विजय सिंह पहली बार 1977 में यहां से विधायक बने थे. उसके बाद से कांग्रेस ये सीट कभी नहीं हारी.
राघौगढ़ के सियासी इतिहास की बात की जाए तो कांग्रेस के इस अभेद्य किले को भेदने में बीजेपी अब तक नाकाम रही है. बतौर मुख्यमंत्री रहते हुए दिग्विजय सिंह ने 2003 में यहीं से शिवराज सिंह चौहान को पराजित किया था.
2008 चुुनाव की बात करें तो कांग्रेस के टिकट पर मूलसिंह दादाभाई लड़े और जीते, लेकिन 2013 में कांग्रेस ने यहां दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह को मैदान में उतारा. वे बीजेपी प्रत्याशी राधेश्याम धाकड़ को शिकस्त देकर पहली बार विधानसभा पहुंचे. इस चुनाव में कांग्रेस को जहां 98041 वोट मिले वहीं बीजेपी को महज 39837 वोट मिले. इस तरह जीत का अंतर 58204 वोटों का रहा.
आज भी राघौगढ़ की जनता सड़क, पानी, बिजली और बेरोजगारी जैसी समस्या से जूझ रही है. आगामी विधानसभा चुनाव की बात करें तो कांग्रेस से जयवर्धन सिंह टिकट के इकलौते दावेदार हैं. वहीं बीजेपी हर बार की तरह इस बार किसी नए प्रत्याशी को यहां से उतार सकती है.