भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर केंद्र की योजनाओं को लागू ना करने का आरोप लगाया है. बीजेपी का आरोप है कि लोकसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश में लोक हितैषी योजनाओं में राजनीति की जा रही है.
एट्रोसिटी एक्ट पर सवर्णों का विरोध झेल चुकी बीजेपी ने गरीब सवर्णों को साधने के लिए लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उनके लिए 10 फीसदी आरक्षण का मास्टर स्ट्रोक खेला तो जरूर लेकिन अब चुनौती इस बात की है कि मध्य प्रदेश में इसे लागू कैसे किया जाए.
वहीं केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मुख्यमंत्री कमलनाथ पर आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की राशि प्रदेश में किसानों को नहीं मिल रही है, क्योंकि प्रदेश सरकार ने पात्र किसानों की सूची केंद्र को नहीं भेजी है. बीजेपी की मानें तो कांग्रेस को मोदी सरकार के इन फैसलो के कारण सवर्णों और किसानों के बीजेपी के पाले में जाने का डर सता रहा है.
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कहा कि मोदी जी ने केंद्र सरकार ने सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए 10 फीसदी आरक्षण दिया है. इसे कई राज्यों ने लागू कर दिया है, लेकिन मध्य प्रदेश की सरकार इस पर हाथ पर हाथ धरे बैठी है. जब संसद में सभी दलों ने इसका समर्थन किया है तो फिर मध्य प्रदेश में इसे लागू करने में क्या समस्या है.
वहीं केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि गोरखपुर में इस योजना को प्रधानमंत्री ने लॉन्च किया था. 1 करोड़ 1 हज़ार लोगों का डाटा देशभर से आया उनके खातों में पैसा ट्रांसफर करने का काम नरेंद्र मोदी जी ने किया लेकिन मध्य प्रदेश की यह सरकार किसान विरोधी सरकार है. अभी तक 5 हेक्टेयर वाले किसानों का डाटा मध्य प्रदेश की सरकार ने केंद्र सरकार को उपलब्ध नहीं कराया है, इसलिए मध्य प्रदेश के किसानों के खाते में रुपये नहीं पहुंच पाए हैं. तोमर ने कमलनाथ से मांग करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश सरकार जल्दी से जल्दी डाटा भेजें जिससे केंद्र सरकार उनके खाते में पैसा भेजने का काम कर सके.
कांग्रेस का आरोप- बीजेपी करती है सिर्फ जुमलेबाजी
वहीं कांग्रेस का मानना है कि मध्य प्रदेश सरकार सभी वर्गों के हित में ठोस कदम उठा रही है. भाजपा केवल राजनीति करने के लिए बयानबाज़ी कर रही है, क्योंकि बीजेपी हमेशा जुमलेबाजी करती है. जनसम्पर्क मंत्री पीसी शर्मा ने बीजेपी को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि इतने सालों से बीजेपी को किसानों और बेरोजगारों की याद नहीं आई और इसलिए चुनाव से पहले बिना किसी ठोस तैयारी या कार्ययोजना लेकर आए हैं.