मध्य प्रदेश में वंदे मातरम को लेकर अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है. कांग्रेस के भोपाल मध्य से विधायक आरिफ मसूद ने सार्वजनिक मंच से कहा है कि वो वंदे मातरम नहीं बोलेंगे.
दरअसल, सीहोर में एक कार्यक्रम के दौरान आरिफ मसूद ने ये बयान दिया है. कार्यक्रम में मसूद से पहले मंच पर पूर्व विधायक रमेश सक्सेना ने वंदे मातरम का नारा लगाया था, लेकिन जब आरिफ मसूद के बोलने की बारी आई तो उन्होंने कहा कि 'ये हमारी बुनियादी लड़ाई है. मैं शरियत के साथ समझौता नहीं कर सकता और इसलिए वंदे मातरम नहीं बोलूंगा'.
बाद में सवाल पूछने पर आरिफ मसूद ने कहा कि 'हमारे पूर्वजों ने देश के लिए जान दी. हम भी देंगे और हमारी आने वाली नस्लें भी देंगी, लेकिन मैं वंदे मातरम नहीं कहूंगा'. उन्होंने कहा कि वंदे मातरम गाने से देशभक्ति का कोई लेना-देना नहीं है.
बीजेपी ने मांगा इस्तीफा
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के इस बयान पर बीजेपी ने आपत्ति जताते हुए उनका इस्तीफा मांगा है. बीजेपी विधायक और प्रदेश उपाध्यक्ष रामेश्वर शर्मा ने कहा कि 'देश के लोग अच्छे से जानते हैं कि वंदे मातरम क्या है. वो राजनीतिक दल जिन्होंने मसूद को टिकट दिया है और जिन्हें वंदे मातरम गाने से एतराज़ है उन दलों को सोचना चाहिए कि उन्हें वंदे मातरम के नाम से पेट मे दर्द क्यों हो रहा है'. रामेश्वर शर्मा ने सवाल पूछा कि उन्हें वतन की इज़्ज़त करने में आपत्ति क्यों है? और कांग्रेस स्पष्ट करे कि आरिफ मसूद के बयान पर उसका क्या रुख है. बीजेपी ने कांग्रेस से आरिफ मसूद के इस्तीफे की भी मांग की है.
पुराना है वंदे मातरम पर विवाद
हालांकि ये कोई पहली बार नही है जब वंदे मातरम को लेकर मध्य प्रदेश में विवाद हुआ है. इससे पहले हर महीने की पहली तारीख को मंत्रालय में गाए जाने वाला वंदे मातरम गान जब 1 जनवरी को नहीं गाया गया था तो काफी विवाद हुआ था. जिसके बाद कांग्रेस बैकफुट पर आ गई थी. उसके बाद मध्य प्रदेश में नए तरीके से वंदे मातरम गान शुरू किया गया.