मध्य प्रदेश के भोपाल में एक मरीज की कोरोना वायरस से मौत के बाद कांग्रेस नेताओं पर डॉक्टर से बदसलूकी का आरोप लगा है. इस घटना से नाराज डॉक्टर ने इस्तीफा दे दिया. नेताओं के दुर्व्यवहार से व्यथित डॉक्टर ने कहा कि मुझे ऐसी नौकरी नहीं करनी है और इसके बाद उसने इस्तीफा दे दिया. सूबे के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस घटना की निंदा की है. वहीं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. आरपी चौधरी के आग्रह के बाद डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव ने अपना त्यागपत्र वापस ले लिया.
दरअसल, भोपाल के जेपी अस्पताल में एक युवक की कोरोना से मौत हो गई. जिसके बाद युवक के परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया. परिजनों का आरोप है कि कि इलाज में लापरवाही बरती गई. मौत की सूचना मिलते ही पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और पूर्व पार्षद गुड्डू चौहान अस्पताल पहुंचे. इन लोगों ने डॉक्टर से तीखी बहस की. इस हंगामे के बाद मरीज का इलाज करने वाले डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव ने अपने साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगा कर पद से इस्तीफा दे दिया.
डॉक्टर का कहना है कि 'मरीज गंभीर हालत में आया था. उसका ऑक्सीजन सेचुरेशन 30 प्रतिशत था. उसके परिजनों को बता दिया गया था कि उसको बाहर भी नहीं भेज सकते. मैंने बहुत मेहनत की, फिर भी बचा नहीं सके. इसके बाद बाहर से आए लोगों ने मेरे साथ बदतमीजी करते हुए गाली दी. गाली खाने के लिए नौकरी नहीं करनी. मैं अस्पताल आऊंगा तो भी मेरी मानसिक स्थिति ऐसी नहीं है कि कोरोना मरीजों की देखभाल कर पाऊंगा इसलिए मैंने अपना इस्तीफा दे दिया है'.
सूबे के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस घटना की निंदा की है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि ''भोपाल के जेपी अस्पताल में जिस प्रकार कुछ लोगों ने डॉक्टर्स और वहां मौजूद स्टाफ के साथ अभद्र व्यवहार किया, हंगामा खड़ा किया, वह बेहद शर्मनाक है. किसी भी व्यक्ति को हमारे डॉक्टर्स के साथ दुर्व्यवहार करने का कोई अधिकार नहीं है. आज की घटना के कारण जेपी अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने अत्यंत व्यथित होकर इस्तीफा तक सौंप दिया है. हम एक सभ्य समाज में रह रहे हैं, इस समय जब साथ मिलकर खड़े होने की ज़रूरत है, ऐसे में हंगामा करना न तो जनहित में है और न ही इससे #COVID19 का मुकाबला किया जा सकता है.''