मध्य प्रदेश के मानपुर विधानसभा की सियासत में हर चुनाव में दिलचस्प समीकरण बनते हैं. सीट पर फिलहाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कब्जा है, और कांग्रेस आगामी चुनाव में विधायक की नाकामियों को लेकर उतरने के लिए तैयार है. मगर सवाल है कि यदि इस बार वह सही उम्मीदवार चयन में नाकाम रही तो उसके मध्य प्रदेश में सरकार बनाने के इरादे का क्या होगा?
असल में, पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा की मीना सिंह ने 2,16,002 में से 70,024 वोट यानी 43.71 प्रतिशत मत पाने में कामयाबी हासिल की थी. लेकिन वहीं कांग्रेस को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था. कांग्रेस की शकुंतला प्रधान 25,778 वोट मतलब 16.09 मत प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रही थीं. जबकि निर्दलीय उम्मीदवार गायत्री सिंह 26,396 वोट लेकर रनरअप रही थीं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस बार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस भाजपा को शिकस्त दे पाएगी. क्या वह तीसरे स्थान से उठाकर पहले स्थान पर कायम कर पाएगी?
कहां चूकी कांग्रेस?
अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित सीट मानपुर से भाजपा की उम्मीदवार मीना सिंह 2008 में भी चुनाव जीतने में कामयाब रही थीं. उस दौरान उन्होंने 1,62,843 वोटों में से 46,694 40.02 फीसदी मत के साथ जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस की गायत्री सिंह 28,990 यानी 24.85 मत प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहीं.
विधानसभा चुनाव 2008 और 2013 के नतीजे बताते हैं कि कांग्रेस उम्मीदवार चयन के मामले में आत्मविश्वास की कमी या अंतर्कलह का शिकार हो गई. 2008 में कांग्रेस की गायत्री दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि 2013 में उन्हें टिकट नहीं मिला तो उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया और दूसरे स्थान पर रहीं. फर्ज कीजिए 2013 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस उन्हें टिकट दे पाती तो संभवतः उसे पराजय का सामना नहीं करना पड़ता.
स्वास्थ और शिक्षा बदहाल
बहरहाल, चुनावी रणभेरी बजने में बस कुछ महीने बाकी हैं और आमने-सामने कांग्रेस-भाजपा होंगी. मानपुर विधानसभा पर जीत का परचम लहराने के लिए रणनीतियां बनने लगी हैं. विधानसभा के पहले ही भाजपा को तगड़ा झटका लगा है क्योंकि बीजेपी नेता और जनपद पंचायत मानपुर के अध्यक्ष रामकिशोर चतुर्वेदी ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है.
मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के इस इलाके में आज भी विकास की रफ्तार काफी सुस्त नजर आती है. पार्टियां हर चुनाव के पहले यहां से कुपोषण और बेरोजगारी जैसी समस्या हटाने की बात करती हैं मगर चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि इन मुद्दों से दूरी बना लेते हैं. मानपुर की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है. रोजगार के साधनों के अभाव में इलाके में पलायन थम नहीं पा रहा है. स्कूली शिक्षा के साथ उच्च शिक्षा की भी हालत खराब है. इसके अलावा स्थास्थ्य सुविधाएं भी बदहाल हैं. कुपोषण को लेकर स्वास्थ्य अमला नाकाम साबित हो रहा है. मानपुर में किसान भी परेशान नजर आता है. किसानों को फसलों का सही दाम भी नहीं मिल पा रहा है.