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मध्य प्रदेश: 'मामा शिवराज' बने टीचर, स्कूल जाकर ली बच्चों की क्लास

मध्य प्रदेश सरकार बच्चों में पढ़ने के प्रति रूचि बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है. प्रदेश के शासकीय प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में मिल बांचे कार्यक्रम किया गया. जिसमें वॉलेंटियर ने बच्चों से संवाद किया और पढ़ने के लिए प्रेरित किया.

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सीएम शिवराज बने टीचर
सीएम शिवराज बने टीचर

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को वैसे तो सब मामा के नाम से भी जानते हैं, लेकिन शुक्रवार को मामा शिवराज स्कूली छात्रों के लिए 'टीचर' बन गए.

मौका था मिल बांचे कार्यक्रम का, जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सिहोर ज़िले के लाड़कुई गांव के स्कूल पहुंचे और बच्चों को पढ़ाया. शिवराज सिंह चौहान ने छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ खेल-कूद और योग की गतिविधियों में भी भाग लेने को कहा.

इस दौरान सीएम ने अभिभावकों से कहा कि वो बच्चों की रूचि को समझें और उसी के हिसाब से उन्हें आगे बढ़ने दें. अभिभावकों से बात करते हुए सीएम ने कहा कि बच्चों पर ज़रूरत से ज़्यादा पढ़ाई का दबाव ना डालें. शिवराज सिंह ने छात्रों से कहा कि वो अपना आत्मविश्वास बिल्कुल भी डिगने ना दें और नंबर कम आने पर घबराए नहीं. छात्रों में पढ़ाई के कारण बढ़ते कॉम्पिटिशन और तनाव को ध्यान में रखते हुए शिवराज ने छात्रों से कहा कि पढ़ाई लिखाई में छोटी-मोटी असफलताएं आती हैं लेकिन इससे छात्रों को घबराना नहीं बल्कि इस डर पर काबू पाना है.

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शिवराज सिंह ने छात्रों से कहा किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए प्रयास करना बेहद ज़रूरी है, जैसे निशाना लगाते समय अर्जुन को मछली की सिर्फ आंख दिखी थी. सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं, मिल बांचे कार्यक्रम के तहत प्रदेश की पुलिस के मुखिया डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला भोपाल के तुलसी नगर के स्कूल में छात्रों को पढ़ाने पहुंचे. वहीं भोपाल कलेक्टर सुदामा खड़े, भोपाल के सांसद आलोक संजर समेत शिवराज सरकार के सभी मंत्री और शासकीय अधिकारी अपने-अपने जिलों के स्कूलों में छात्रों के बीच पहुंचे और उन्हें पढ़ाया.

क्या है 'मिल बांचे' कार्यक्रम

मिल बांचे कार्यक्रम के तहत कोई भी जनप्रतिनिधि या इच्छुक व्यक्ति स्कूली छात्रों को बतौर वॉलेंटियर स्कूल में जाकर पढ़ा सकता है. पढ़ाई के अलावा स्कूली बच्चों को सवाल-जवाब, ग्रुप डिस्कशन या फिर उनकी पढ़ाई से संबंधित चीज़ों के बारे में जागरुक किया जाता है.

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