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एमपीः सिरदर्द बना कैबिनेट विस्तार, पुराने दिग्गज और सिंधिया खेमा कतार में

मध्य प्रदेश में उपचुनाव के बाद शिवराज कैबिनेट में 6 मंत्री पद खाली हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने मंत्रिमंडल का विस्तार करना एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है. सिंधिया समर्थकों के चलते पिछली बार के मंत्रिमंडल विस्तार में शिवराज के करीबी कई विधायक मंत्री नहीं बन पाए थे, जिन्हें मौका दें या फिर सिंधिया खेमे से खाली हुए पद पर उन्हीं के करीबियों को बैठाएं?

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ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिवराज सिंह चौहान
ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिवराज सिंह चौहान
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शिवराज मंत्रिमंडल में छह मंत्री पद खाली है
  • सिंधिया समर्थक तीन मंत्री चुनाव हार गए हैं
  • सिंधिया कोटे से पांच मंत्री पद रिक्त हो गए

मध्य प्रदेश विधानसभा उपचुनाव के बाद शिवराज सिंह चौहान टेम्पररी से परमानेंट मुख्यमंत्री बन गए हैं. उपचुनाव में शिवराज कैबिनेट के ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक 14 मंत्रियों में से तीन मंत्री चुनाव हार गए थे, जिन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. वहीं, सिंधिया के करीबी दो मंत्रियों ने 6 महीना का पूरा समय होने के चलते पहले ही मंत्री की कुर्सी छोड़ दी थी और एक मंत्री पद पहले से खाली है. इस तरह से मंत्रिमंडल में 6 पद खाली हैं, जिसके चलते शिवराज कैबिनेट का विस्तार जल्द किए जाने की संभावना है. ऐसे में मंत्रिमंडल के विस्तार में सिंधिया खेमे में ही मंत्री पद आएगा या फिर मंत्री बनने से चूक गए बीजेपी विधायकों को मौका मिलेगा. 

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बता दें कि मध्य प्रदेश में मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के 22 समर्थक विधायकों ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया था, जिसके बाद कमलनाथ सरकार की सत्ता से विदाई हो गई थी. इसके बाद शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सरकार बनी. शिवराज कैबिनेट में सिंधिया के 14 समर्थकों को मंत्री बनाया गया था. नवंबर में हुए 28 सीटों पर उपचुनाव में सिंधिया के सभी 22 समर्थकों ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से 9 चुनाव हार गए हैं. 

एमपी उपचुनाव में हारने वाले सिंधिया समर्थकों में तीन मंत्री भी शामिल हैं. डबरा विधानसभा सीट से इमरती देवी, सुमावली विधानसभा सीट से ऐदलसिंह कंषाना और दिमनी से गिर्राज डंडौतिया को मात मिली है, जिसके बाद तीनों ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. इसके अलावा तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत को 6 महीने का समय पूरा होने के चलते 164 (4) के तहत मंत्री पद छोड़ना पड़ा था. इसके अलावा एक मंत्री पद पहले से ही खाली है, जिसे मिलाकर 6 मंत्री पद फिलहाल भरे जाने हैं. 

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मंत्रिमंडल विस्तार की चुनौती 

दरअसल, उपचुनाव के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने मंत्रिमंडल का विस्तार करना एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है. सिंधिया समर्थकों के चलते पिछली बार के मंत्रिमंडल विस्तार में शिवराज के करीबी कई विधायक मंत्री नहीं बन पाए थे. इनमें विंध्य अंचल की रीवा विधानसभा सीट से पांचवीं बार चुनाव जीते सीनियर विधायक राजेंद्र शुक्ला शिवराज सरकार के पिछले कार्यकाल में मंत्री रह चुके हैं. सिलवानी से बीजेपी विधायक रामपाल सिंह पिछली शिवराज सरकार में मंत्री थे, पर इस बार वे मंत्री नहीं बन पाए. 

बालाघाट सीट से सातवीं बार बीजेपी विधायक बने गौरीशंकर बिसेन को पिछली सरकारों में मंत्री रहने का अनुभव है. लेकिन इस बार उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया था. इसके अलावा पाटन सीट से बीजेपी विधायक अजय विश्नोई और संजय पाठक जैसे कई पूर्व मंत्री की नजर भी मंत्रिमंडल पर है. 

शिवराज कैबिनेट में मौजूदा समय में 6 मंत्री पद खाली हैं. उपचुनाव में तुलसीराम सिलावट और गोविंद जीतकर आए हैं, जिन्हें सिंधिया के करीबी होने के चलते दोबारा से मंत्रिमंडल में शामिल होने का मौका मिल सकता है. हालांकि, इसके अलावा चार मंत्री पद और बचते हैं, जिन पर मंत्री बनने का मौका किसे मिलेगा? ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सिंधिया कोटे के खाली हुए पद उन्हीं के खेमे के विधायकों के पास जाएंगे या फिर बीजेपी के पुराने विधायकों के पास, जिन्हें पहले मंत्री बनने का मौका नहीं मिल सका था. ये तो अब कैबिनेट विस्तार के बाद ही पता चल सकेगा? 

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