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MP: अभी शिवराज की मुश्किल हल नहीं, 4 दिन बाद भी नहीं हो सका विभागों का बंटवारा

मध्य प्रदेश में तमाम कवायदों के बाद किसी तरह शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार तो हो गया है, लेकिन चार दिन के बाद भी मंत्रियों के विभागों का बंटवारा नहीं हो सका है. कहीं ऐसा तो नहीं कि विभागों के बंटवारे में सिंधिया अपने समर्थक मंत्रियों को मलाईदार विभाग देने के लिए जोर डाल रहे हों, जिसकी वजह से पेच फंसा गया हो.

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ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिवराज सिंह चौहान
ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिवराज सिंह चौहान

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  • शिवराज कैबिनेट में सिंधिया समर्थकों का दबदबा
  • मंत्रालय के मलाईदार विभागों पर जोर, फंसा पेच

मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के जोड़-तोड़ से शिवराज सिंह चौहान की अगुआई में बीजेपी की सरकार तो बन गई. तमाम कवायदों के बाद किसी तरह शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार भी हो गया है, लेकिन चार दिन के बाद भी मंत्रियों के विभागों का बंटवारा नहीं हो सका है. माना जा रहा है कि विभागों का बंटवारे में सिंधिया अपने समर्थक मंत्रियों को मलाईदार विभाग देने की डिमांड कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विभागों को लेकर अंतिम निर्णय लेने से पहले रविवार को दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और महामंत्री बीएल संतोष से मुलाकात की. इसके पहले शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ भी बैठक की थी. माना जा रहा है कि सोमवार को दिल्ली प्रवास से लौटने के बाद शिवराज सिंह चौहान अपनी कैबिनेट के मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा करेंगे.

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दरअसल, कमलनाथ सरकार में सिंधिया खेमे के पास स्वास्थ्य, राजस्व, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, परिवहन, श्रम और खाद्य विभाग थे. बताया जा रहा है कि सिंधिया ये विभाग अपने समर्थकों को दिलाने की जुगत में हैं. इन विभागों के अलावा कुछ अन्य अहम विभागों पर भी सिंधिया और उनके सहयोगी मंत्रियों की निगाहें हैं.

पहले विस्तार में उनके करीबी तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत को कमल नाथ सरकार की अपेक्षा कम महत्वपूर्ण विभाग मिले तो राजनीतिक गलियारों में इसे सिंधिया के प्रभाव से जोड़कर देखा जाने लगा. चर्चा यहां तक होने लगी थी कि अब वह बीजेपी के दबाव में हैं, लेकिन मंत्रिमंडल के दूसरे विस्तार में अपने दर्जन भर समर्थकों को शामिल कराकर उन्होंने अपनी सियासी ताकत दिखा दी. शिवराज कैबिनेट में 14 सिंधिया समर्थक मंत्री हैं, जिनमें 9 कैबिनेट और 5 राज्यमंत्री बनाए गए हैं.

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वहीं, शिवराज सिंह चौहान ने पिछले दिनों शिव के विष पीने की बात कहकर अपने दिल का गुबार तो निकाल दिया, लेकिन उनकी पीड़ा कम नहीं हो सकी. मंत्रिमंडल विस्तार के चार दिन बीत जाने के बावजूद विभागों को लेकर आम राय नहीं बन पाई. शिवराज की सरकार बनाने का सबसे अहम भूमिका ज्योतिरादित्य सिंधिया की रही है. ऐसे में माना जा रहा है कि सिंधिया इस एवज में अपने समर्थकों को अच्छे और प्रभावी विभाग दिलवाना चाहते हैं.

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माना जा रहा है कि सिंधिया अपने समर्थक मंत्रियों को महत्वपूर्ण विभागों के लिए मुख्यमंत्री से अपेक्षा कर चुके हैं. इधर, मुख्यमंत्री अपने चहेतों को बढ़िया विभाग सौंपना चाहते हैं. इस बीच संगठन की ओर से तीसरा मोर्चा भी खुल रहा है. बीजेपी संगठन कुछ मंत्रियों को बेहतर विभाग देकर उनकी हैसियत और अहमियत बढ़ाना चाहता है. इसी के चलते कैबिनेट विस्तार के चार दिन बाद विभागों का बंटवारा नहीं हो सका है.

बता दें, शिवराज सिंह ने अपनी कैबिनेट में 28 नए चेहरे शामिल किए हैं. इन चेहरों में से 12 को सिंधिया खेमे के हैं. कैबिनेट विस्तर के बाद सीएम शिवराज ने सिंधिया की मौजदूगी में उनके सभी समर्थक मंत्रियों से 15-15 मिनट तक वन-टू-वन चर्चा भी की थी. ऐसे में अब देखना है कि कैबिनेट विस्तार में जिस तरह से सिंधिया की एकतरफा चली है वैसे ही विभागों के बंटवारे में चलती है या नहीं.

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