मध्य प्रदेश में उपचुनाव की तारीख नजदीक आते ही सियासी पारा चढ़ना शुरू हो गया है. इस उपचुनाव में सबकी नजरें अगर किसी पर टिकी है तो वो हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक नेता जो कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए हैं.
इनकी एक बानगी मंगलवार को बमोरी विधानसभा में बीजेपी प्रत्याशी और सिंधिया समर्थक महेंद्र सिंह सिसोदिया के समर्थन में चुनावी सभा करने आए ज्योतिरादित्य सिंधिया के बयानों में भी दिखी.
दरअसल, यहां चुनावी सभा को संबोधित करते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, 'यह चुनाव महेंद्र सिंह सिसोदिया का नहीं है, यह चुनाव कांग्रेस-बीजेपी का नहीं है, ये आपको समझना है यह चुनाव मेरा है. पूरा देश देख रहा है कि ग्वालियर चंबल संभाग में सिंधिया परिवार का झंडा बुलंद रहेगा या नहीं. अगर सिंधिया परिवार का मान सम्मान रखना है, तो 3 तारीख को ना देखना है प्रत्याशी, ना देखना है पार्टी, केवल मुझे और शिवराज जी को देखकर कमल का बटन दबाओ.'
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बता दें कि मार्च 2020 में कमलनाथ सरकार के गिरने की सबसे बड़ी वजह थी ज्योतिरादित्य सिंधिया का कांग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी में जाना. सिंधिया के साथ ही उनके समर्थक विधायकों ने भी विधायकी से इस्तीफा दे दिया था और उसके बाद बीजेपी का दामन थाम लिया था.
इस तरह विधानसभा की एक के बाद एक 25 सीटें खाली होती गईं और 3 सीटें विधायकों के निधन से खाली हो गईं. नतीजतन मध्य प्रदेश में 28 सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं और सबकी नजरें इसी बात पर है कि सिंधिया समर्थक कितने नेता पार्टी बदलने के बाद चुनाव जीत पाते हैं.