मध्य प्रदेश के बैतूल में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान युवतियों का कौमार्य परीक्षण (वर्जिनिटी टेस्ट) और प्रेग्नेंसी टेस्ट किया गया. 9 युवतियों के रिजल्ट्स पॉजिटिव आए और उनकी शादी रोक दी गई.
मध्य प्रदेश में पहले भी इस तरह के मामले सामने आते रहे हैं. राष्ट्रीय महिला आयोग ने कई बार इन मामलों पर गंभीर संज्ञान लेने की बात भी कही है, लेकिन ताजा मामले ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
मिली जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम स्थल पर स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात की गई थी ताकि कोई युवती दोबारा शादी न कर पाए. दोबारा शादी करने वाली महिलाओं की पहचान के लिए गैरकानूनी रूप से जांच की गई. प्रेग्नेंसी किट से महिलाओं के गर्भवती होने की जांच की गई. जांच में 9 युवतियां पॉजिटिव पाई गईं. शादी रोकने के बाद उनसे दहेज का सामान भी वापस ले लिया गया.
फिलहाल, इस मामले से महिलाओं में खासी नाराजगी देखी जा रही है. हालांकि जिला कलेक्टर ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं.
इससे पहले मध्य प्रदेश के ही शहडोल में इसी योजना के तहत सामूहिक विवाह से पहले 151 युवतियों का कथित वर्जिनिटी टेस्ट कराया गया था, जिसमें 14 लड़कियां गर्भवती पाई गईं थी. तब कांग्रेस ने इसका विरोध किया और कहा था कि यह असंवैधानिक है.