मध्य प्रदेश के सियासी रण में सचिन पायलट उतर चुके हैं. मंगलवार को पायलट ने करेरा से कांग्रेस प्रत्याशी त्यागी लाल जाटव के लिए प्रचार किया. 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर 3 नवंबर को वोटिंग होगी. वहीं, सचिन पायलट ने आजतक से खास बातचीत में कई मुद्दों पर अपनी राय रखी. हालांकि उन्होंने सिंधिया पर हमला नहीं किया.
पहली चुनावी सभा से आपको क्या लगा?
जहां-जहां उपचुनाव हो रहा है, वहां कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी बेहद मजबूत स्थिति में हैं, जनता और मतदाता कांग्रेस के पक्ष में हैं, सभी सीटों पर कांग्रेस पार्टी जीतेगी.
ये सिंधिया का गढ़ है. प्रचार में क्या कहेंगे उनके बारे में?
हम अपनी पार्टी का प्रचार कर रहे हैं, वो अपनी पार्टी का प्रचार कर रहे हैं, अंत में जो वोटर हैं, जो जनता जनार्दन है, वही निर्णय करेंगे कि किसके पक्ष में वोट करना है. मुद्दे जनता के सामने हैं, उम्मीदवार जनता के सामने हैं.
मध्य प्रदेश में पिछले 15-20 साल से मेरा आना-जाना लगा रहा, यहां के कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को हम जानते-समझते हैं और मैं पार्टी के प्रत्याशियों के लिए वोट मांगने आया हूं, मुझे पूरा विश्वास है कि मेरी गुजारिश पर लोग वोट करेंगे.
इस उपचुनाव के लिए किसे जिम्मेदार मानते हैं?
जब बीजेपी को जनता ने बाहर बैठा दिया था, तो तिकड़म लगाकर फिर से सत्ता में वो आए हैं, जनता पूछ रही है कि हमने आपको घर बैठाया था और शिवराज सिंह चौहान आज मुख्यमंत्री बने हैं, लेकिन जो घोटाले हुए थे या किसानों पर गोलियां चली हों मंदसौर में, उसका आजतक कोई संतोषजनक जवाब मिला नहीं है. इतने लोगों की हत्याएं हुईं व्यापम में, इतने घोटाले हुए उसपर कोई जवाब नहीं दिया. सत्ता का दुरुपयोग कर आप लगातार लोगों को रिझाने की कोशिश करेंगे वो कब तक चलेगा.
गद्दार कौन है?
जनता सब जानती है किसने क्या किया है. अंतिम निर्णय उनके हाथ में है. हम अपनी बात रख रहे हैं वो अपनी बात रख रहे हैं. लेकिन मैं इतना चाहता हूं, कि सरकार दुरुपयोग ना करे, पुलिस का, प्रशासन का. निष्पक्ष चुनाव जो, जनता के ऊपर छोड़ा जाए. किसको जिताना है, किसको हराना है.
सिंधिया के बीजेपी में जाने के फैसले पर क्या बोले पायलट?
हर व्यक्ति स्वतंत्र है अपना निर्णय लेने के लिए. किस विचारधारा में उनको रहना है, मैं अपनी चॉइस करता हूं कोई अपनी और चॉइस करता है, और सबको ये छूट होनी भी चाहिए. अंत में जनता को फैसला करना है कि वो निर्णय सही थे या गलत थे.
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आपने भी बगावत की थी. फिर क्या हुआ?
मेरी पार्टी के अंदर इतना लोकतंत्र है कि कोई भी अपनी बात रख सकता है और मैंने जो मुद्दे उठाए थे उसका सकारात्मक निर्णय होगा मैं जानता हूं, क्योंकि एक उच्च स्तरीय कमिटी बनी है 3 लोगों की और बहुत जल्द इस पर निर्णय लिया जाएगा. किसानों की, नौजवानों की बात हम हमेशा उठाते हैं, चाहे पक्ष में हों या विपक्ष में.
अशोक गहलोत के साथ अब सब ठीक है?
संबंध हमेशा मधुर थे और रहेंगे. बात व्यक्तियों की नहीं मुद्दों की है, गवर्नेंस की है, कमिटमेंट की है और उन सबको लेकर हमने बात उठाई थी और खुशी है कि आलाकमान ने उसका संज्ञान लिया है.
बता दें कि जिन 28 सीटों पर उपचुनाव होना है, उनमें ज्यादातर सीटें वो हैं जो कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे से खाली हुई थीं जिसके चलते कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिर गई थी. ये सभी विधायक सिंधिया समर्थक हैं और जिन इलाकों में फिलहाल उपचुनाव हो रहे हैं वो सिंधिया का इलाका माना जाता है.