मध्यप्रदेश में अब लव जिहाद पर प्रहार करने के बाद शिवराज सरकार के सख्त तेवरों का खामियाजा पत्थरबाजी करने वालों को भो भुगतना पड़ सकता है. दरअसल, मध्यप्रदेश में पत्थरबाजी को अपराध मानते हुए इसके खिलाफ कानून बनाने की तैयारी होने जा रही है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को इस बात के संकेत दिए हैं कि जल्द ही मध्यप्रदेश में पत्थरबाजों की खैर नहीं रहेगी.
उन्होंने कहा कि 'प्रदेश में पत्थरबाजी करने वालें समाज के दुश्मन हैं. पत्थरबाजी कोई साधारण अपराध नहीं है. इससे लोगों की जान भी जा सकती है, इससे भय और आतंक का माहौल पैदा होता है, भगदड़ मचती है, अव्यवस्थाएं होती हैं. इस तरह के अपराधी साधारण अपराधी नहीं है इन्हीं छोड़ा नहीं जाएगा. अभी तो मामूली सी कार्यवाही होती थी अब हम कड़ी सजा का प्रावधान करने के लिए कानून बना रहे हैं.
उन्होंने आगे कहा कि केवल पत्थरबाजी नहीं, कई बार उत्पाती सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं, आग लगा देते हैं, सार्वजनिक संपत्ति के साथ-साथ व्यक्तिगत संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया जाता है. किसी की दुकान में आग लगा दी, किसी के यहां तोड़फोड़ कर दी, यह अक्षम्य अपराध है. शांतिपूर्ण ढंग से कोई अपनी बात कहें लोकतंत्र इसकी इजाजत देता है. लेकिन आग लगा दो, तोड़फोड़ कर दो, पत्थर चला दो, इसकी इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती और इसलिए भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने तय किया है की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ ना केवल कड़ी कार्रवाई करेंगे बल्कि सार्वजनिक संपत्ति को कोई नुकसान पहुंचाता है तो सजा के साथ-साथ संपत्ति का जो नुकसान होगा. वह भी वसूल किया जाएगा उसकी संपत्ति को राजसात करना पड़े तो राजसात करके वसूली करेंगे और नुकसान की भरपाई करेंगे.
किसी व्यक्तिगत की संपत्ति को भी जला दिया तोड़-फोड़ कर दी तो उसके नुकसान की भरपाई भी उपद्रवी से की जाएगी. इसके लिए कड़े कानून बनाने का निर्देश मैंने दिया है जल्द ही कानून सामने आएगा. दरअसल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में शांति का टापू कहे जाने वाले मध्यप्रदेश में एक के बाद एक तीन अलग-अलग शहरों में पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आई है. हाल ही में उज्जैन इंदौर और मंदसौर मैं पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आई थी जिस पर सरकार ने सख्त कार्रवाई के आदेश भी दिए थे.
वहीं, दूसरी तरफ मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा भी बोल चुके हैं कि जिस भी धार्मिक ढांचे से पथराव की घटना सामने आती है सरकार को कानून बनाकर आने वाले समय में उसका अधिग्रहण कर लेना चाहिए और जरूरी होने पर उसे ढहा भी देना चाहिए.