
मध्य प्रदेश में उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर क्षेत्र के गर्भ में कई अहम और ऐतिहासिक चीजें मिली हैं. मंदिर विस्तातिकरण प्रोजेक्ट के तहत यहां पर खुदाई कार्य चल रहा है, लेकिन इस दौरान 11वीं और 12वीं शताब्दी की कई मूर्तियां मिली हैं. जांच टीम का कहना है कि गहराई में जाने पर और भी बहुत कुछ मिलने की संभावना है.
खुदाई में मिले ऐतिहासिक अवशेषों को सुरक्षित अन्न क्षेत्र में रखा गया है. करीब दो वर्षों से खुदाई व निर्माण कार्य चल रहा है. मप्र. पुरातत्व अधिकारी ने की खुदाई में कई चीजों के मिलने की पुष्टि कर दी है. मंदिर के विस्तातिकरण को लेकर सीएम शिवराज सिंह चौहान इस साल 12 जनवरी को उज्जैन पहुंचे थे. शिवराज ने 500 करोड़ की लागत से विस्तारीकरण योजना को मंजूरी दी थी.
अयोध्या थीम की भी झलक
प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में यहां मंदिर में अयोध्या थीम की भी झलक दिखेगी. कुछ ही महीनों पहले निरीक्षण के लिए अयोध्या से आर्किटेक्ट आए थे. फ्रांस के राजदूत इमेन्यूअल लेनिन भी 80 करोड़ का दान दे चुके हैं तो ज्योतिरादिया सिंधिया ने हाल ही में मंदिर के लिए केंद्र से करीब 72 करोड़ रुपये पास करवाए थे.
शुंग काल से जुड़ा इतिहास
उज्जैन के महाकाल मंदिर का इतिहास शुंग काल से जुड़ा हुआ है जिसकी पुष्टि मध्य प्रदेश पुरातत्व अधिकारियों की टीम ने भी की है. मंदिर क्षेत्र के गर्भ में मिले इतिहास का निरीक्षण करने पहुंची मप्र. संस्कृति विभाग की पुरातत्व संरक्षण की जांच टीम ने बताया मंदिर में मिले अवशेषों से स्पष्ट हुआ है कि मंदिर शुंग काल में भी स्थापित रहा है.
पुरातत्व संरक्षण की जांच टीम का मानना है कि दक्षिण में शुंग काल की दीवार और उत्तर में मूर्तियां 11वीं और 12वीं शताब्दी की मिली हैं जिसमें स्तम्भ खंड, शिखर के भाग, रथ का भाग और भरवाई कीचक ये सब शामिल हैं. इन सब चीजों से स्पष्ट होता है कि शुंग काल में भी मंदिर की स्थापना रही है.
टीम लगातार जांच कर रही है. मंदिर विस्तारीकरण को लेकर चल रहे खुदाई कार्य में पिछले साल भी हवन कुंड, चूल्हा और कई अन्य सामान के साथ मंदिर की मूर्तियां, शिखर, दीवार व अन्य चीजें निकली थीं, जिसके बाद इस साल दोबारा मूर्तियां निकलना अपने आप में अहम है.
जेसीबी की खुदाई से हो रहा नुकसानः पुरातत्व
पुरातत्व अधिकारियों और अन्य जानकारों का मानना है कि दिल्ली से आए आक्रमणकारी सुल्तान इल्तुतमिस द्वारा मंदिर पर आक्रमण किया गया था और तभी से मंदिर की ये दुर्दशा हुई जो अब खुदाई कार्य के दौरान निकल रही है.
हालांकि टीम का कहना है कि जेसीबी की खुदाई से काफी नुकसान जो रहा है. जल्द ही नई नीति पर कार्य करना होगा. महाकालेश्वर मंदिर को 850 करोड़ की स्वीकृति के साथ मंदिर परिसर 2.4 हेक्टर से 35 हेक्टर का होना तय किया गया था.
महाकाल मंदिर को तिरुपति, सोमनाथ, मदुरई, मीनाक्षी देवी की तर्ज पर बनाया जाना तय हुआ था. पिछले साल 18 दिसंबर को सबसे पहले मंदिर क्षेत्र की खुदाई के दौरान प्राचीन दीवार व नक्काशी किए गए पत्थर जमीन में से निकले थे, जिसकी जानकरी पुरातत्व विभाग के अधिकारी रमण सोलंकी ने देते हुए बताया था कि महाकाल मंदिर को लेकर जो स्मार्ट सिटी द्वारा विस्तारीकरण का कार्य किया जा रहा है, उसमें खुदाई के दौरान कुछ महत्वपूर्व अवशेष निकले हैं जो कि पहली बार प्राप्त हुए है. उन्होंने कहा कि जब-जब भी सिंहस्थ कुंभ आता है तो निर्माण कार्य होते ही हैं लेकिन इस प्रकार का स्ट्रक्चर कभी हमें प्राप्त नहीं हुआ था.
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मप्र. पुरातत्व संस्कृति विभाग के अधिकारी रमेश यादव ने बताया कि 'प्रमुख सचिव संस्कृति एवं आयुक्त पुरातात्विक के निर्देशों के परिपालन में पुरातत्व की टीम महाकाल मंदिर क्षेत्र में 11वीं- 12वीं शताब्दी के मंदिर के जो अवशेष मिले हैं उसके निरीक्षण हेतु मंदिर पहुची है. जांच में उत्तर वाले पोर्शन में जहां खुदाई चल रही है, वहां मंदिर के ये अवशेष पाए गए हैं.
उन्होंने बताया कि स्तम्भ खंड, शिखर के भाग, रथ का भाग, भरवाई कीचक भी खुदाई में मिले हैं. ये सभी खुदाई के दौरान इधर-उधर फैले हुए मिले हैं. कुछ दिन पहले भी मंदिर में इस तरह के अवशेष मिले थे, वहीं दक्षिण की ओर शुंग काल की एक दीवार मिली है, जिसकी और गहराई में जाएंगे तो हो सकता है कि कुछ और भी अहम चीजें मिलीं. उन्होंने कहा कि पूर्व में वाकणकर साहब पुरातत्व अधिकारी रहे हैं. उनको कुंड के पास शुंग काल के अवशेष मिल चुके हैं. इससे स्पष्ट होता है कि मंदिर की स्थापना शुंग काल में भी रही है.