प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार शाम मुंबई के मरोल में अलजामी-तुस-सैफियाह (सैफी अकादमी) के नए परिसर का उद्घाटन किया. पीएम ने अकादमी का दौरा किया. यहां वे काफी देर तक रुके और बोहरा समुदाय के लोगों से मुलाकात की. पीएम ने कैंपस में कबूतर उड़ाए. रोटी भी बनाते दिखे. सभा में खुद को समुदाय से सीधा कनेक्ट भी किया. पीएम ने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि इस परिवार से 4 पीढ़ियों से जुड़ा हूं.
बताते चलें कि दाऊदी बोहरा समुदाय का अल्जामिया-तुस-सैफिया प्रमुख शैक्षणिक संस्थान है. सैफी अकादमी समुदाय की परंपराएं सीखने और साक्षरता संस्कृति की रक्षा के लिए काम कर रही है. पीएम मोदी ने कहा कि समय और विकास के साथ बदलाव के पैमानों पर दाऊदी बोहरा समुदाय ने हमेशा खुद को साबित किया है. आज अलजामी-तुस-सैफियाह जैसे महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थानों का विस्तार उसी का जीता जागता उदाहरण है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं यहां ना तो पीएम के तौर पर हूं और ना सीएम के तौर पर. मेरे पास जो सौभाग्य है, वह शायद बहुत कम लोगों को मिला है. मैं इस परिवार से 4 पीढ़ियों से जुड़ा हुआ हूं. सभी 4 पीढ़ियां मेरे घर आ चुकी हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब मैं आप सभी से मिलता हूं तो यह एक परिवार में आने जैसा लगता है. जब मैंने आपका वीडियो देखा तो मुझे एक शिकायत है. बदलाव कीजिए, मैं आपके परिवार का सदस्य हूं, यहां प्रधानमंत्री बनकर नहीं आया हूं.
पीएम ने कहा कि मैं सभी 4 पीढ़ियों को जानता हूं, उनसे बातचीत की है, सभी मेरे घर आए हैं. आपसे मिलने पर मेरी खुशी बढ़ जाती है. समय के साथ बदलते और विकास की ओर बढ़ते बोहरा समुदाय ने हमेशा खुद को साबित किया है. यह शैक्षणिक संस्थान एक जीता जागता उदाहरण है. 150 साल का सपना पूरा करने के लिए मैं आपको बधाई देता हूं.
पीएम का कहना था कि दाऊदी बोहरा समुदाय से मेरा नाता पुराना ही नहीं, बल्कि किसी से छिपा भी नहीं है. अपनी एक यात्रा के दौरान मैंने सैयदना साहब को 98 वर्ष की आयु में 800 से अधिक छात्रों को पढ़ाते हुए देखा. वह घटना मुझे आज तक प्रेरित करती है.
पीएम ने कहा कि समाज में योगदान देने के मामले में भी वे काफी आगे रहे हैं. कुपोषण या पानी की कमी की समस्या के खिलाफ लड़ाई में उन्होंने यह सब किया है. जब भी मुझे उनसे मिलने या बातचीत करने का मौका मिला, मैंने प्रेरणा ली और सीखा.
पीएम का कहना था कि जब भी मुझे सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन साहब से बातचीत करने का मौका मिला, उनकी सक्रियता और सहयोग ने मुझे हमेशा ऊर्जा से भर दिया. मेरे गुजरात से दिल्ली आने के बाद भी वह मुझ पर प्यार बरसाते रहे.
मोदी ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भारत कभी नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों का केंद्र हुआ करता था. पूरी दुनिया से लोग यहां सीखने और पढ़ने आते थे. अगर हमें भारत के वैभव को वापस लाना है तो हमें शिक्षा के उस गौरव को भी वापस लाना होगा.
पीएम ने कहा कि मैं देश ही नहीं, विदेश में भी कहीं जाता हूं, मेरे बोहरा भाई-बहन मुझसे जरूर मिलने आते हैं. वो चाहे दुनिया के किसी भी कोने में क्यों ना हों, किसी भी देश में क्यों ना हों, उनके दिलों में भारत की चिंता और भारत के लिए प्रेम हमेशा दिखाई देता है.
मोदी ने दाऊदी बोहरा समुदाय की प्रभावशाली ढंग से प्रशंसा की और कहा- बदलते समय के अनुसार इसके सदस्य भी खुद को बदलने की कसौटी पर खरे उतरे हैं. मोदी ने समुदाय के लिए अपने आउटरीच में कहा- मैं यहां एक परिवार के सदस्य के रूप में हूं, प्रधानमंत्री के रूप में नहीं.
मोदी ने कहा कि किसी समुदाय, समाज या संगठन की पहचान इस बात से होती है कि समय के अनुसार उसने अपनी प्रासंगिकता को कितना कायम रखता है? समय के साथ परिवर्तन और विकास की इस कसौटी पर दाऊदी बोहरा समुदाय ने हमेशा खुद को साबित किया है.
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आज भारतीय कलेवर में ढली आधुनिक शिक्षा व्यवस्था देश की प्राथमिकता है. इसके लिए हम हर स्तर पर काम कर रहे हैं. पिछले 8 वर्षों में रिकॉर्ड संख्या में विश्वविद्यालय खुले हैं और हम हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोल रहे हैं.
पीएम ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश में अभूतपूर्व विश्वास का माहौल बना है. उन्होंने कहा कि देश ने 40,000 अनुपालनों को समाप्त कर दिया है और सैकड़ों कानूनी प्रावधानों को कम कर दिया है.
मोदी ने कहा कि सरकार अब नौकरी देने वालों के साथ मजबूती से खड़ी है. पीएम ने अपनी सरकार द्वारा चिकित्सा शिक्षा को दिए जा रहे बड़े प्रोत्साहन के बारे में बात की.