एल्गार परिषद मामले के एक आरोपी रोना विल्सन के वकील का दावा है कि उसके लैपटॉप से बरामद साजिश के मेल को प्लांट करवाया गया था. ये मेल रोना विल्सन ने नहीं लिखे थे. अधिवक्ता का कहना है कि रोना के लैपटॉप से छेड़छाड़ की गई थी.
बता दें कि कोर्ट के आदेश पर आरोपी के पास से बरामद लैपटॉप की हार्ड डिस्क के क्लोन को अमेरिका के अर्सनाल डिजिटल फोरेंसिक लैब भेजा गया था.
आरोपी रोना विल्सन के अधिवक्ता ने अर्सनाल की रिपोर्ट आने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. इस रिपोर्ट के बाद अधिवक्ताओं ने कहा है कि इस मामले की जांच के लिये विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाये.
बता दें कि जून 2018 में पुलिस ने दिल्ली से रोना विल्सन को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने दावा किया था कि रोना विल्सन के कंप्यूटर से बहुत से दस्तावेज मिले, जिसमें एक पत्र ऐसा था, जिसमें कथित तौर पर हथियारों की आवश्यकता और वर्तमान सरकार को उखाड़ फेंकने की योजना के बारे में लिखा था.
बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर याचिका में अमेरिका स्थित एक फर्म द्वारा एक डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, जिसमें दावा किया गया है कि विल्सन के कंप्यूटर में एक छिपे हुए फोल्डर में एक अज्ञात साइबर हमलावर द्वारा पत्र और अन्य दस्तावेज प्लांट किये गए थे. रोना विल्सन पिछले दो वर्षों से सलाखों के पीछे हैं.
अर्सनाल की रिपोर्ट के मुताबिक रोना विल्सन के कंप्यूटर में 22 महीने तक छेड़छाड़ की गई थी. विल्सन के कंप्यूटर पर 13 जून 2016 को मालवेयर हमला किया गया था. उस समय सह आरोपी वरवारा राव के अकॉउंट का इस्तेमाल कर रोना विल्सन को संदिग्ध ईमेल भेजे गए.
उन ईमेल में वरवारा राव के खाते का उपयोग करने वाले व्यक्ति ने विल्सन को एक विशिष्ट दस्तावेज खोलने के लिए कई बार कोशिश की, आखिर में लगभग तीन घंटे के बाद जब विल्सन ने उस लिंक को खोला तो मालवेयर को विल्सन के लैपटॉप में घुसपैठ का मौका मिल गया.