अपनी पहचान छुपाकर भारत में रह रहे अफगान नागरिक हबीबुल्लाह प्रांग को कोर्ट ने मुंबई में दोषी पाया है. उसे 11 महीने जेल की सजा सुनाई गई है और 8000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. इसके बाद उसे अफगानिस्तान वापस डिपोर्ट करने का आदेश दिया गया है. वह 2007 यानी 18 साल से मुंबई में रह रहा था. मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट 5 ने फरवरी 2024 में एक रेड के दौरान उसे गिरफ्तार किया था.
38 वर्षीय हबीबुल्लाह प्रांग (उर्फ जहीर अली खान) मूल रूप से अफगानिस्तान के पाकिता प्रांत के तामेर जुरमत जिले का रहने वाला है. वह 2007 से मुंबई के वडाला में रह रहा था. उसने जाली दस्तावेज बनवा रखे थे, और जहीर अली खान के नाम से पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवाए थे. मामले की जांच के दौरान मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उसे दोषी पाया.
जेल और जुर्माने के बाद डिपोर्ट करने का आदेश
मुंबई में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उसे 11 महीने जेल की सजा और 8000 रुपये जुर्माने के बाद वापस अफगानिस्तान भेजने का आदेश दिया है. यूनिट इंचार्ज पुलिस इंस्पेक्टर घनश्याम नायर, जांच अधिकारी सदानंद येरेकर, कोर्ट ऑफिसर पीएसआई विजय बेंडाले और पुलिस कांस्टेबल राऊसाहेब फुंडे ने सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई.
मुंबई क्राइम ब्रांच ने इन धाराओं में दर्ज किया था केस
मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट-5 ने हबीबुल्लाह प्रांग के खिलाफ आईपीसी की धारा 465, 468 और 471 के साथ-साथ पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12(1)(ए) और 12(3), विदेशी नागरिक आदेश, 1948 के नियम 6 और विदेशी नागरिक अधिनियम की धारा 5 और 14(ए)(बी) के तहत अपराध संख्या 19/24 दर्ज किया था.