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22 दिन के मासूम को गर्म हंसिए से 65 बार दागा... अमरावती में सामने आई अंधविश्वास की सनसनीखेज कहानी!

महाराष्ट्र के अमरावती (Amravati) में खौफनाक मामला सामने आया है. यहां 22 दिन के मासूम को पारंपरिक इलाज के नाम पर गर्म हंसिए से 65 बार दाग दिया गया. नवजात को सांस लेने में दिक्कत थी, इसी को लेकर यह अमानवीयता की. मासूम की हालत गंभीर है, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चे को जन्मजात हृदय रोग हो सकता है.

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एसएनसीयू में बच्चे का चल रहा है इलाज. (Screengrab)
एसएनसीयू में बच्चे का चल रहा है इलाज. (Screengrab)

महाराष्ट्र के अमरावती (Amravati) से खौफनाक घटना सामने आई है. यहां अंधविश्वास के चलते 22 दिन के मासूम को गर्म हंसिए से 65 बार दागा गया, जिससे मासूम की हालत बिगड़ गई. पारंपरिक इलाज के नाम पर इस कृत्य को अंजाम दिया गया. बच्चे की हालत गंभीर होने पर उसे अमरावती के अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस इस पूरे मामले की जांच-पड़ताल में जुटी है.

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जानकारी के अनुसार, यह घटना चिखलदरा के सीमोरी गांव की है. कल 26 फरवरी को नवजात को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. परिजनों ने बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाने की बजाय अंधविश्वास के चलते उसे गर्म हंसिए से दाग दिया. परिजनों को लग रहा था कि इस तरीके से बच्चा ठीक हो जाएगा. इसके उलट उसकी स्थिति बिगड़ गई.

इसके बाद उसे परतवाड़ा उप जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उसकी हालत गंभीर होने के कारण अमरावती अस्पताल रेफर कर दिया गया. डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे को जन्मजात हृदय संबंधी समस्या हो सकती है, जिसकी वजह से उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी.

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विशेषज्ञों का कहना है कि गर्म हंसिए से दागने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और यह बच्चे के लिए बेहद खतरनाक हो सकता था. बच्चे की वास्तविक बीमारी का पता लगाने के लिए 2D इको टेस्ट की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है.

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अगर बच्चे की स्थिति ज्यादा बिगड़ती है तो उसे नागपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर किया जा सकता है. लोगों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी पारंपरिक झोलाछाप इलाज और तंत्र-मंत्र पर कुछ लोग भरोसा कर लेते हैं, जिससे मासूमों की जान खतरे में पड़ जाती है.

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