महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने दावा किया कि बीजेपी के कुछ विधायक एनसीपी (एसपी) में शामिल होने के इच्छुक हैं. उन्होंने अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी की पिंपरी-चिंचवाड़ के प्रमुख अजीत गव्हाने और 2 पूर्व पार्षदों के इस्तीफे का हवाला दिया. गव्हाने ने बुधवार को कहा था कि वे शरद पवार का आशीर्वाद लेंगे.
पीटीआई के मुताबिक अनिल देशमुख ने दावा किया कि बीजेपी के कुछ विधायक भी उनकी पार्टी में शामिल होना चाहते हैं, क्योंकि वे सरकार में प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से निराश हैं. उन्होंने ये भी कहा कि एनसीपी (अजित पवार के नेतृत्व वाली) के विधायक भी वापस आएंगे. हालांकि शरद पवार तय करेंगे कि किसे एनसीपी (एसपी) में लिया जाएगा.
यह पूछे जाने पर कि क्या अजित पवार भी शरद गुट वाली एनसीपी में शामिल होंगे, इस पर देशमुख ने कहा कि वह अपनी पार्टी बना रहे हैं, उन्हें इसका विस्तार करने दें. शरद पवार ने बुधवार को कहा था कि उनकी पार्टी में किसी भी नेता की संभावित एंट्री पर फैसला सामूहिक तौर पर लिया जाएगा. उन्होंने इस बात की पुष्टि करने से इनकार कर दिया कि अगर अजित पवार वापस लौटना चाहते हैं तो उन्हें शामिल किया जाएगा या नहीं.
अजित पवार खेमे में अशांति की अटकलें तब लगने लगी थीं, जब उनके नेतृत्व वाली एनसीपी ने हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में जिन चार सीटों पर चुनाव लड़ा था, उनमें से तीन सीटें हार गईं. इसके विपरीत शरद गुट वाली एनसीपी ने कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के साथ गठबंधन में 10 में से 8 सीटें जीती थीं.
नागपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अनिल देशमुख ने राज्य सरकार से उनके खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच करने वाले आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने को कहा और चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह अदालत जाएंगे.
उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर चांदीवाल आयोग की रिपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाए रखने का आरोप लगाया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उन्हें क्लीन चिट दी गई है. एनसीपी (एसपी) नेता ने कहा कि मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने उनके खिलाफ आरोप लगाए थे, जब वह राज्य के गृह मंत्री थे, जिसके बाद उन्होंने खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से जांच शुरू करने को कहा था. उन्होंने कहा कि राज्य ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश कैलाश चांदीवाल के नेतृत्व में एक आयोग का गठन किया था, जिसने 2 साल पहले 11 महीने बाद 1,400 पन्नों की रिपोर्ट पेश की थी. देशमुख ने कहा कि अनुरोधों के बावजूद रिपोर्ट को न तो सार्वजनिक किया गया है और न ही अब तक राज्य विधानसभा के समक्ष रखा गया है.