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पात्रा चॉल घोटाला: शिवसेना सांसद संजय राउत को बड़ी राहत, PMLA कोर्ट से मिली जमानत

पात्रा चॉल जमीन घोटाला 1,039 करोड़ रुपये का है. इस घोटाले में ED ने प्रिवेन्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत केस दर्ज किया था. ईडी ने इस मामले में 31 जुलाई को संजय राउत को गिरफ्तार किया था.

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शिवसेना सांसद संजय राउत को जमानत
शिवसेना सांसद संजय राउत को जमानत

शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत को बड़ी राहत मिली है. उन्हें PMLA कोर्ट  ने जमानत दे दी है. कोर्ट ने संजय राउत के साथ प्रवीण राउत को भी जमानत दे दी है. संजय राउत को पात्रा चॉल जमीन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 31 जुलाई को गिरफ्तार किया था. हालांकि, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने जमानत को चुनौती दी है. इस मामले में अब 3 बजे सुनवाई होगी. 

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पात्रा चॉल जमीन घोटाला 1,039 करोड़ रुपये का है. इस घोटाले में ED ने प्रिवेन्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत केस दर्ज किया था. इसके बाद ईडी ने संजय राउत के घर तलाशी में 11.5 लाख रुपये भी जब्त किए थे. इस मामले में अप्रैल में ED ने राउत की पत्नी वर्षा राउत और उनके करीबियों की 11.15 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की थी. 

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सीधे तौर पर शामिल थे राउत- ईडी

ईडी ने कुछ समय पहले इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल की थी. ईडी के मुताबिक, शिवसेना सांसद संजय राउत पात्रा चॉल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवीण राउत के जरिए सीधे तौर पर शामिल थे. ईडी ने दावा किया था कि 2006-07 के दौरान संजय राउत ने तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री की अध्यक्षता में पात्रा चॉल के पुनर्विकास को लेकर पूर्व सीएम की अध्यक्षता में महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) के अफसरों और अन्य लोगों के साथ कई बैठकों में भाग लिया था.

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ईडी के मुताबिक, इसके बाद, मामले में आरोपी राकेश वधावन को मेसर्स गुरुआशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से पात्रा चॉल परियोजना के पुनर्विकास के लिए लाया गया. संजय राउत ने नियंत्रण करने के लिए गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक के रूप में प्रवीण राउत को अपने प्रॉक्सी और विश्वासपात्र के रूप में शामिल किया.

क्या है मामला?

ईडी की चार्जशीट के मुताबिक सोसाइटी और MHADA के साथ किए गए समझौते के अनुसार उन्हें 672 किरायेदारों का पुनर्वास कर सभी के लिए 767 वर्ग फुट के फ्लैट का निर्माण करना था. इसके लिए MHADA को 111467.82 वर्ग मीटर का एक क्षेत्र दिया गया था. बदले में जमीन पर मुफ्त बिक्री घटक विकसित करने और थर्ड पार्टी के खरीदारों को फ्लैट बेचने का हकदार था.

हालांकि, गुरुआशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने अपना दायित्व पूरा करने से पहले एफएसआई को बेच दिया. FSI को GACPL (गुरुआशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड) द्वारा थर्ड पार्टी डेवलपर्स को 1034 करोड़ रुपये में बेचा गया था. 

'संपत्तियों के खरीदने-बेचने की प्रक्रिया में शमिल थे राउत'

ईडी की चार्जशीट के मुताबिक जांच में यह भी पता चला कि संजय राउत के प्रॉक्सी प्रवीण राउत को एचडीआईएल से उनके बैंक खाते में 112 करोड़, जिसे बाद में संपत्ति खरीदने, व्यावसायिक इकाई, परिवार के सदस्यों आदि के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया. इस प्रकार, संजय राउत अवैध तरीके से आय प्राप्त करने और संपत्ति के अधिग्रहण के लिए हस्तांतरण और अन्य संस्थाओं को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया में शामिल थे.

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