एक महिला से शादी करने और उसे लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर बलात्कार करने के आरोपी को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दी है. आरोपी इस मामले में दो साल से अधिक समय से जेल में बंद था. इसके अलावा आरोपी के खिलाफ ऐसे ही चार मामले दर्ज हैं. न्यायमूर्ति अनिल किलोर की पीठ ने कहा, "इस तथ्य पर विचार करते हुए कि प्रथम दृष्टया सहमति से संबंध थे और चूंकि आवेदक ने कारावास की पर्याप्त अवधि पूरी कर ली है, मेरा मानना है कि आवेदक जमानत पाने का हकदार है."
दरअसल, अभियोक्ता एक विवाहित महिला है, जो फेसबुक के माध्यम से सोशल मीडिया पर आरोपी से परिचित हुई थी. आरोपी संतोष दत्ताराय पवार ने कथित तौर पर उसे पीडब्ल्यूडी में नौकरी दिलाने का वादा किया था और इस बहाने उसने उससे पैसे मांगे थे. अभियोजन पक्ष के अनुसार उससे लगभग ₹ 8.64 लाख की जबरन वसूली की गई. बाद में जब कोई नौकरी नहीं मिली, तो उसने अपने पैसे वापस मांगने शुरू कर दिए, तो आरोपी ने कथित तौर पर अभियोक्ता को भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल किया और शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाए.
शिकायत के मुताबिक आरोपी खुद भी विवाहित व्यक्ति बताया जाता है, जिसने कथित तौर पर वीडियो बनाए और उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी देकर सोने के गहने भी ऐंठ लिए. पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त लोक अभियोजक एसएम मनगांवकर और अभियोक्ता की ओर से पेश अधिवक्ता विनीत जैन ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी के चार आपराधिक मामले हैं, जिनमें महिला पीड़ित शामिल हैं. सत्र न्यायालय ने आरोपी की कार्यप्रणाली को देखते हुए जमानत खारिज कर दी थी, इस आधार पर कि आरोपी ने चार बार एक ही तरह के अपराध किए हैं और जमानत पर रिहा होने के बाद उसके द्वारा फिर से ऐसा करने की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता.
हालांकि, आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता यश नाइक ने आरोप-पत्र की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह दर्शाता है कि प्रथम दृष्टया आरोपी और पीड़िता के बीच सहमति से संबंध थे. नाइक ने आगे दलील दी कि आरोपी के खिलाफ दर्ज चार मामलों में से दो में उसे बरी कर दिया गया है, एक अपराध में सबूतों के अभाव में और दूसरे में सहमति से संबंध बनाने के आधार पर. सभी दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत मंजूर कर दी.