कोरोना संकट के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में वेंटिलेटर को लेकर काफी परेशानी सामने आई. बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए वेंटिलेटर की स्थिति पर तल्ख टिप्पणी की. अदालत ने कहा कि अगर केंद्र सरकार द्वारा दिए गए वेंटिलेटर खराब पाए गए हैं, तो उन्हें रिप्लेस करना चाहिए.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, हाईकोर्ट ने कहा कि वो इनका मरीज़ों पर प्रयोग नहीं करने दे सकते हैं, क्योंकि उससे जान जाने का खतरा रहेगा.
दरअसल, महाराष्ट्र को केंद्र सरकार द्वारा कई वेंटिलेटर उपलब्ध करवाए गए हैं. लेकिन 100 के करीब वेंटिलेटर खराब निकले. बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार द्वारा जानकारी दी गई थी कि केंद्र द्वारा मुहैया कराए गए करीब 100 वेंटिलेटर मराठवाड़ा क्षेत्र में खराब मिले, ऐसे में उनका इस्तेमाल नहीं हो सका.
राज्य सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि सरकार के मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटर को चेक किया गय था, लेकिन वो काम करने लायक नहीं थे. बार-बार सुधार करने के बाद भी वेंटिलेटर सही तरह से काम नहीं कर रहे थे.
केंद्रीय टीम करेगी वेंटिलेटर की जांच
हालांकि, केंद्र की ओर से इस दावे पर आपत्ति जाहिर की गई. केंद्र की ओर से पेश वकील ने जानकारी दी कि दिल्ली के राम मनोहर लोहिया और सफदरजंग अस्पताल से दो सीनियर डॉक्टर औरंगाबाद के सरकारी अस्पताल का दौरा करेंगे और वेंटिलेटर को परखेंगे. केंद्र का कहना था कि स्टाफ को उनका इस्तेमाल करने में दिक्कत आ रही होगी.
केंद्र ने साफ किया कि अगर वेंटिलेटर काम नहीं कर रहे हैं तो मैन्युफैक्चर कंपनी की जिम्मेदारी है. अदालत की ओर से कहा गया कि अगर वेंटिलेटर काम नहीं कर रहे हैं, तो उन्हें रिप्लेस करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी.
बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस आर.वी. घूगे, जस्टिस बी.यू. देबद्वार की औरंगाबाद बेंच ने अब छानबीन के बाद रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. इस मामले की अगली सुनवाई 7 जून को होगी.
आपको बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा पीएम केअर्स के अंतर्गत देश के अलग-अलग राज्यों में सरकारी अस्पतालों को वेंटिलेटर और अन्य सामान उपलब्ध कराए गए हैं. कई राज्यों में वेंटिलेटर की खराबी, इस्तेमाल ना होने की शिकायत पहले भी आ चुकी है.