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महाराष्ट्र: कोविड काल में BMC के कामकाजों की जांच करेगी CAG, शिंदे सरकार ने दिए आदेश

महाराष्ट्र में कोविड काल के दौरान BMC के कामकाज की CAG द्वारा जांच की जाएगी. इसके लिए राज्य की शिंदे सरकार ने आदेश दे दिए हैं. जांच में भ्रष्टाचार, कॉन्ट्रैक्ट के आवंटन में अनदेखी समेत कई प्वाइंट शामिल किए जाएंगे.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

महाराष्ट्र की शिंदे सरकार ने कोविड काल के दौरान बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) की कार्यप्रणाली की जांच के आदेश दिए हैं. लिहाजा बीएमसी के पिछले 2 साल के कामकाज की  नियंत्रक एवं महा लेखापरीक्षक (CAG) द्वारा जांच की जाएगी. कोविड काल में BMC के जरिए कोरोना केंद्रों का आवंटन, जरूरी वस्तुओं की खरीद और अवैध तरीके से किए गए कार्यों को भी जांच के दायरे में लाया जाएगा.

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दरअसल, कोविड काल में लोगों को कोई असुविधा न हो, इसके लिए बिना टेंडर प्रक्रिया के तत्काल सुविधाओं की व्यवस्था और सामान खरीदने को प्राथमिकता दी गई थी. हालांकि बीजेपी ने कई बार महाविकास अघाड़ी सरकार पर सत्ता का दुरुपयोग करने और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था. अब राज्य सरकार ने सीएजी को इन सभी मामलों की जांच कर जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है.

CAG ऑडिट में ये मुद्दे किए गए हैं शामिल

कोविड केंद्र घोटाला 


बीएमसी द्वारा कोविड केंद्रों का संचालन और चिकित्सा सेवा प्रदान करने का काम गैर-पारदर्शी तरीके से किया गया था. मसलन, लाइफलाइन अस्पताल मैनेजमेंट सर्विस को 5 केंद्रों का ठेका दिया गया था. जबकि इस कंपनी का गठन कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने के समय हुआ भी नहीं था. इसके बाद कहा गया था कि यह फर्म अपंजीकृत है और करीब 100 करोड़ रुपये का ठेका गैर पारदर्शी तरीके से दिया गया. 

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दवाई खरीद मामला 

कोविड के दौरान बीएमसी द्वारा की गई खरीद में मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया था. दरअसल, बीएमसी ने 7 अप्रैल 2020 को 1568 रुपये प्रति शीशी की रेट पर रेमडेसिविर की 2 लाख शीशियों का ऑर्डर दिया था. जबकि उसी दिन महाराष्ट्र सरकार के हाफकाइन इंस्टीट्यूट और मीरा भयंदर नगर निगम ने 668 रुपये की दर से रेमेडिसविर की शीशी खरीदी थी.

- विभिन्न कोविड केंद्रों पर विभिन्न सामग्रियों की खरीद के लिए सहायक आयुक्त को वार्ड स्तर पर भी असाधारण अधिकार प्रदान किए गए थे. जो बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार में लिप्त थे. कोविड केंद्रों के निर्माण के लिए जिस तरह से कोविड केंद्रों को ठेके दिए गए, उसका भी विशेष ऑडिट किए जाने की जरूरत है.

दहिसर भूमि अधिग्रहण और खरीद घोटाला 


MCGM ने निशाल्प रियल्टी (अल्पेश अजमेरा) से एकसार/दहिसर में जमीन खरीदी थी. इसके लिए 349 करोड़ रुपये का भुगतान किया था. इसमें यह देखा गया कि अल्पेश अजमेरा ने वही जमीन 2.55 करोड़ रुपये में खरीदी थी. इस जमीन की खरीद का कई नगर आयुक्तों ने कड़ा विरोध किया था. वहीं बिल्डर ने कोर्ट में जाकर 900 करोड़ रुपये की मांग की है. यह एमसीजीएम के सबसे बड़े घोटालों में से एक है, इसकी जांच किए जाने की जरूरत है.

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ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र खरीद घोटाला 


बीएमसी ने साल 2021 में जून-जुलाई में विभिन्न अस्पतालों में स्थापित होने वाले ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों को खरीदने का आदेश दिया था. इसके लिए हाईवे कंस्ट्रक्शन नाम की एक कंपनी को गैर-पारदर्शी तरीके से ठेका दिया गया था. हालांकि मंत्री असलम शेख ने इसका विरोध भी किया था. क्योंकि ये कंपनी ब्लैक लिस्टेड थी. 

मनमाने तरीकों से दिया गया कॉन्ट्रैक्ट

मनीष राधाकृष्ण वलंजू ने कुर्ला 'L' वार्ड का ठेका जीनहेल्थ डायग्नोस्टिक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दिया था. कंपनी उनके पिता राधाकृष्ण बालकृष्ण वलंजू के साथ जुड़ी हुई है. इन नई कंपनियों को मनमाने तरीकों से विभिन्न वार्डों में RT-PCR की जांच का कॉन्ट्रेक्ट दिया गया था.

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