अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन उर्फ राजेंद्र निकालजे ने 2001 के होटल व्यवसायी जय शेट्टी हत्याकांड में सजा निलंबित करने और जमानत की मांग करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. सीबीआई ने उसकी याचिका का कड़ा विरोध किया है.
मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 30 मई को राजन के खिलाफ फैसला सुनाया था और उसे दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. मामले में शामिल तीन अन्य शूटर्स को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी.
4 मई 2001 को हुई थी हत्या
साउथ मुंबई में 'गोल्डन क्राउन' होटल के मालिक जय शेट्टी की 4 मई 2001 को उनके ऑफिस के सामने दो अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. घटना के बाद, एक आरोपी अजय सुरेश मोहिते उर्फ अजय सूरजभान श्रेष्ठ उर्फ अजय नेपाली उर्फ चिकना हथियारों के साथ रंगे हाथ पकड़ा गया था. उस पर जय शेट्टी को गोली मारने का आरोप था. उसका साथी कुंदनसिंह रावत भागने में सफल रहा था लेकिन बाद में उसे भी पकड़ लिया गया था.
सुनवाई पूरी होने का इंतजार करते-करते रावत की मौत हो गई. वहीं मोहिते को एक मुठभेड़ में गोली मार दी गई, जब वह सजा के बाद पैरोल पर था. हालांकि, मोहिते सहित तीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. कुछ महीने पहले राजन को दोषी ठहराते और सजा सुनाते समय अदालत ने इसी फैसले पर भरोसा जताया था.
शेट्टी के बेटों ने दी गवाही
ट्रायल कोर्ट में, शेट्टी के बेटों ने गवाही दी थी और अदालत के सामने कहा कि उन्हें यह पता था कि राजन की ओर से 50 लाख रुपये की जबरन वसूली के लिए कॉल किए जा रहे थे, जिसे उनके पिता देने से इनकार कर रहे थे.
अधिवक्ता सुदीप पसबोला के माध्यम से दायर राजन की याचिका में कहा गया है कि अभियोजन पक्ष ने राजन के खिलाफ संदेह के अलावा अपना मामला साबित नहीं किया है और रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत उसे दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं थे.
याचिका में क्या दलील दी गई?
याचिका में कहा गया है कि उनके मुकदमे में न्यायाधीश कथित तौर पर पिछले फैसले से काफी प्रभावित थे. 'ट्रायल जज को देखना चाहिए था कि दोनों मुकदमे अलग-अलग थे और दर्ज किए गए सबूत अलग-अलग थे.' राजन की याचिका में कहा गया है, 'वर्तमान मामले का फैसला केवल उसमें दर्ज साक्ष्यों के आधार पर किया जाना था.'
20 अगस्त को होगी सुनवाई
याचिका में कहा गया है कि शेट्टी के मैनेजर ने मिली धमकियों के संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी और यह शिकायत राजन नहीं बल्कि हेमंत पुजारी द्वारा दी गई धमकियों के संबंध में की गई थी. इसमें कहा गया, 'सिर्फ यह आरोप कि हेमंत पुजारी छोटा राजन गिरोह से जुड़ा था, राजन को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं था. यह कोई सबूत नहीं था कि हेमंत पुजारी राजन के इशारे पर काम कर रहा था और उसके कहने पर मृतक को धमकी दे रहा था.'
राजन की याचिका पर जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे और जस्टिस पृथ्वीराज चव्हाण की बेंच 20 अगस्त को सुनवाई करेगी. राजन 2011 के पत्रकार जे डे हत्याकांड में भी आजीवन कारावास की सजा काट रहा है.