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डांस बार पर बैन जारी रहना चाहिए: देवेंद्र फड़नवीस

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि राज्य सरकार बार तथा अन्य स्थानों पर डांस प्रस्तुतियों पर रोक जारी रखने के अपने रुख पर सुप्रीम कोर्ट में जोर देगी.

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देवेंद्र फड़नवीस (फाइल फोटो)
देवेंद्र फड़नवीस (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि राज्य सरकार बार तथा अन्य स्थानों पर डांस प्रस्तुतियों पर रोक जारी रखने के अपने रुख पर सुप्रीम कोर्ट में जोर देगी.

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उनकी यह टिप्पणी महाराष्ट्र पुलिस कानून संशोधन 2014 के कार्यान्वयन को स्थगित करने के शीर्ष अदालत के फैसले के मद्देनजर आई है. आदेश से राज्य में डांस बार के फिर से खुलने का रास्ता साफ हो गया है. महाराष्ट्र पुलिस कानून संशोधन 2014 के तहत बार तथा अन्य स्थानों पर डांस प्रस्तुतियों पर रोक लगा दी गई थी. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में एक संशोधन जोड़ा और राज्य में लाइसेंस प्रदान करने वाले प्राधिकारों को डांस बार तथा अन्य स्थानों पर अश्लील डांस प्रदर्शन के नियमन की अनुमति दे दी.

फड़नवीस ने शीर्ष अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘यद्यपि उच्चतम न्यायालय के अंतरिम आदेश में डांस बार पर प्रतिबंध की जगह नियमन की बात कही गई है, लेकिन राज्य सरकार अब भी प्रतिबंध की हिमायती है.’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हम अध्ययन करेंगे और उच्चतम न्यायालय में अपनी मांग पर जोर देंगे.' अदालत ने इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर अब अंतिम सुनवाई के लिए पांच नवंबर की तारीख निर्धारित की है और कहा कि समान मुद्दे से संबंधित मामले पर यह अदालत 2013 में पहले ही फैसला कर चुकी है.

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राज्य विधानसभा ने 2014 में डांस बार पर प्रतिबंध लगाने के लिए बिना चर्चा के कानून पारित कर दिया था. इससे पहले शीर्ष अदालत बार में डांस प्रस्तुतियों पर रोक लगाए जाने के पहले कानून को खारिज कर चुकी थी. रेस्तरां मालिकों ने कानून को यह कहकर चुनौती दी थी कि यदि राज्य सरकार डांस प्रस्तुतियां नहीं होने देगी तो इस काम से अपनी आजीविका चलाने वाली बहुत सी महिलाओं को वेश्यावृत्ति के लिए विवश होना पड़ेगा.

राज्य पुलिस ने बार में डांस प्रस्तुतियों के खिलाफ पहली बार 2005 में कार्रवाई शुरू की थी. हालांकि, पांच सितारा होटलों सहित बड़े प्रतिष्ठानों को छूट दी गई थी. उसके बाद राज्य सरकार सभी प्रतिष्ठानों में डांस प्रस्तुतियों पर रोक लगाने का कानून लेकर आई.

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