महाराष्ट्र सरकार में अजित पवार गुट के मंत्री छगन भुजबल ने खुलासा किया कि उन्होंने बीते साल नवंबर में ही मंत्री पद से इस्तीफा देने की बात सामने आने के बाद से महाराष्ट्र की राजनीति में हड़कंप मच गया है. छगन ने राज्य सरकार पर ओबीसी कोटा में मराठा समुदाय को पीछे वाले दरवाजे से प्रवेश की सुविधा देने का आरोप लगाते हुए अपना त्यागपत्र दिया है.
अब महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि OBC के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है.
'स्वीकार नहीं हुआ कैबिनेट मंत्री का इस्तीफा'
महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री के इस्तीफा देने की अटकलों के बारे में बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया को बताया कि इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे स्पष्टीकरण दे पाएंगे, लेकिन मैं अभी केवल इतना ही कह सकता हूं कि ओबीसी नेता छगन भुजबल का इस्तीफा मुख्यमंत्री या मैंने स्वीकार नहीं किया गया है.
मराठों के आरक्षण के खिलाफ नहीं हूं: छगन भुजबल
एकनाथ शिंदे सरकार में कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल ने अपने इस्तीफे का खुलासा शनिवार को अहमदनगर में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, वह मराठों को आरक्षण मिलने के विरोध में नहीं है, लेकिन मौजूदा ओबीसी कोटा शेयर करने के खिलाफ हैं. विपक्ष के कई नेता, यहां तक कि मेरी सरकार के नेता भी कहते हैं कि मुझे इस्तीफा दे देना चाहिए. किसी ने कहा कि भुजबल को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाना चाहिए.
'17 नवंबर को दे दिया था इस्तीफा'
मैं विपक्ष, सरकार और अपनी पार्टी के नेताओं को बताना चाहता हूं कि 17 नवंबर को अंबाद में आयोजित ओबीसी एल्गर रैली से पहले मैंने 16 नवंबर को ही कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया और उसके बाद कार्यक्रम में शामिल होने गया था.
उन्होंने आगे कहा कि मैं इस मुद्दे पर ढाई महीने तक इसलिए चुप रहे, क्योंकि मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम ने उनसे इस बारे में नहीं बोलने से मना कर दिया था.
भुजबल ने सरकार पर लगाया गंभीर आरोप
उन्होंने सरकार पर मराठा आरक्षण नेता मनोज जरांगे की मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है. इस एकनाथ शिंदे के एक विधायक ने उनपर समाज में दरार पैदा करने की कोशिश का आरोप लगाया था और कहा कि सरकार को उन्हें बर्खास्त कर देने चाहिए.