महाराष्ट्र कैडर की ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर (34 साल) विवादों में हैं. पूजा को लेकर हर रोज नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. पूजा ने अलग-अलग पतों पर और अलग-अलग शहरों में डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई किया था. पूजा ने अपनी पढ़ाई लेकर यूपीएससी में नौकरी हासिल करने तक में डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट लगाए हैं और कोटे का लाभ उठाया है. पूजा की नौकरी के मामले में जांच के लिए केंद्र सरकार ने पैनल गठित किया है. दो हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है.
इस बीच, पिंपरी के यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल हॉस्पिटल के मेडिकल बोर्ड ने भी स्पष्ट कर दिया है कि पूजा खेडकर को कोई बड़ी शारीरिक विकलांगता नहीं है. बोर्ड का कहना है कि पूजा को 7 फीसदी डिसेबिलिटी है. जबकि किसी नौकरी में कोटे के लिए अभ्यर्थी की 40 प्रतिशत विकलांगता जरूरी है. YCM के डीन राजेंद्र वाबले का कहना है कि 7 प्रतिशत का मतलब है कि शरीर में कोई बड़ी विकलांगता नहीं है. डॉ. वाबले का कहना था कि 24 अगस्त 2022 को पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर का लोकोमोटर डिसेबिलिटी का मामला आया था. वाबले का कहना था कि उनके मामले में बाएं घुटने में एक पुरानी ACL चोट है. इसमें 7 प्रतिशत स्थायी विकलांगता है.
पूजा ने कब और कहां से सर्टिफकेट बनवाए?
वहीं, अहमदनगर के जिला सिविल सर्जन ने बताया कि अस्पताल के तत्कालीन मेडिकल बोर्ड ने पूजा खेडकर को 2018 में विजुअल डिसेबिलिटी का सर्टिफिकेट और 2021 में मानसिक विकलांग प्रमाण पत्र जारी किया था. उसके बाद पूजा ने 2022 में पुणे के YCM और जिला अस्पताल में भी विकलांग पत्र के लिए आवेदन किया था. इस संबंध में पुणे में जिला अस्पताल में सिविल सर्जन डॉ. नागनाथ येमपल्ले ने बताया कि एक बार अस्पताल द्वारा सर्टिफिकेट जारी होने के बाद कोई भी एप्लीकेशन स्वत: रद्द हो जाती है. चूंकि हमारे सिस्टम में देखा गया कि पूजा को पहले ही YCM से लोकोमोटर विकलांगता का सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया है, इसलिए हमारे यहां से एप्लीकेशन को रद्द कर दिया गया था. पुणे में ससून जनरल अस्पताल, जिला अस्पताल, YCM, डीन अस्पताल, कमला नेहरू अस्पताल समेत 9 केंद्रों को विकलांगता के लिए मूल्यांकन का काम सौंपा गया है.
दरअसल, पूजा खेडकर ने आईएएस बनने के लिए विकलांगों के आरक्षित कोटे का इस्तेमाल किया. यह पता चला है कि उन्होंने महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों के सरकारी अस्पतालों में जरूरी चिकित्सा प्रमाणपत्र प्राप्त करने की कोशिश की और इसके लिए अलग-अलग पते दिए.
- पूजा ने पाथर्डी तहसील में अपने गृह गांव के पते पर अहमदनगर जिला अस्पताल से दो बार विकलांगता प्रमाण पत्र प्राप्त किया. साल 2018 में मिले सर्टिफिकेट में बताया गया था कि उन्हें मानसिक विकलांगता है. जबकि 2021 के सर्टिफिकेट में डॉक्टर्स ने बताया कि पूजा खेडकर को दृष्टिबाधित और मानसिक बीमारी जैसी दो विकलांगताएं हैं. हालांकि, 2022 में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में बैठने के लिए पुणे के गोखले नगर में चाणक्य हाउसिंग सोसाइटी में एक फ्लैट का पता दिया था.
- उसके बाद उन्होंने विकलांगता प्रमाण पत्र पाने के लिए पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम के वाईसीएम अस्पताल में आवेदन किया. यहां ताथवड़े इलाके का पता दिया था. लेकिन वहां डॉक्टर्स की राय थी कि पूजा को ना तो आंखों की कोई बीमारी है और ना ही कोई मानसिक बीमारी. हालांकि वाईसीएम के डॉक्टर्स ने 24 अगस्त 2022 को एक प्रमाण पत्र दिया, जिसमें बताया कि पूजा अपने बाएं पैर में चोट के कारण 7% अनफिट हैं. लेकिन यह सात प्रतिशत विकलांगता यूपीएससी की नौकरी हासिल करने लिए पर्याप्त नहीं थी.
- अक्टूबर 2022 में पूजा ने पुणे के औंध जिला अस्पताल में विकलांगता प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया, लेकिन डॉक्टर्स ने इस आधार पर आवेदन खारिज कर दिया कि उसे पहले ही वाईसीएम अस्पताल से सर्टिफिकेट जारी किया जा चुका है. फिर पूजा खेडकर ने यूपीएससी को 2021 का पुराना प्रमाण पत्र जमा कर दिया, जिसमें कहा गया था कि वो दृष्टिबाधित और मानसिक रूप से बीमार हैं. इस सर्टिफिकेट पर पहले आपत्ति भी जताई गई थी. लेकिन बाद में पूजा के सर्टिफिकेट को आश्चर्यजनक तरीके से स्वीकार कर लिया गया.
विकलांग प्रमाण पत्रों की जांच करेगी पुलिस
इधर, पुलिस अब पूजा खेडकर के मेडिकल प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच करेगी. एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि पुणे पुलिस पूजा के शारीरिक विकलांगता श्रेणी के मेडिकल प्रमाणपत्रों की जांच करेगी. विकलांग व्यक्तियों के लिए कमिश्नर कार्यालय ने खेडकर के प्रमाणपत्रों को सत्यापित करने के लिए पुणे पुलिस और जिला कलेक्टरेट को एक पत्र लिखा है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, हमें एक पत्र मिला है. हमसे पूजा खेडकर द्वारा जमा किए गए प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता की जांच करने के लिए कहा गया है. हम इन प्रमाणपत्रों के बारे में तथ्यों को सत्यापित करेंगे, जहां से वे हासिल किए गए थे. ये सर्टिफिकेट किस डॉक्टर या अस्पताल ने जारी किए, यह भी स्कैन किया जाएगा.
किसे दिया जाता है विकलांग प्रमाण पत्र?
ऐसी 5 प्रमुख कैटेगिरी हैं, जब किसी को विकलांग प्रमाण पत्र दिया जाता है. इसमें लोकोमोटर, विजुअल, सुनाई ना देना, मेंटल समस्या, रक्त विकार (हीमोफिलिया, थैलीसीमिया) प्रमुख है. एक बार ऑनलाइन एप्लीकेशन सब्मिट किए जाने के बाद पसंद के अस्पताल का चयन किया जा सकता है. वहां जाकर परीक्षत कराना होता है और उसके बाद विकलांग सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं.
फर्जी प्रमाण पत्र विवाद पर पूजा खेडकर ने तोड़ी चुप्पी...
ट्रेनी आईएएस अधिकारी ने फर्जी सर्टिफिकेट पर सोमवार को तुप्पी तोड़ी और मीडिया ट्रायल का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, जांच कमेटी के सामने अपना पक्ष रखूंगी. सच्चाई की जीत होगी. उन्होंने कहा, मैं विशेषज्ञ समिति के सामने बात रखूंगी और समिति के फैसले को हम स्वीकार करेंगे. जो भी जांच चल रही है, मुझे आपको बताने का अधिकार नहीं है. मेरे पास जो भी निवेदन है, वो करूंगी. बाद में सार्वजनिक करूंगी. हमारा भारतीय संविधान दोषी साबित होने तक निर्दोष मानता है. इसलिए मीडिया ट्रायल द्वारा मुझे दोषी साबित करना गलत है. पूजा का कहना था कि मैंने पहले भी कहा है कि मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकती. नियम मुझे कुछ भी कहने की इजाजत नहीं देते हैं. मैं मीडिया के साथ कुछ भी साझा नहीं कर सकती, जो भी जरूरी होगा मैं कमेटी के साथ साझा करूंगी. 2023 बैच की आईएएस पूजा खेडकर वर्तमान में महाराष्ट्र के वाशिम जिले में असिस्टेंट कलेक्टर के तौर पर तैनात हैं.
नॉन-क्रीमी लेयर ओबीसी प्रमाणपत्र भी जमा किया था
पूजा खेडकर ने 2007 में एमबीबीएस प्रवेश के लिए नॉन-क्रीमी लेयर ओबीसी प्रमाणपत्र जमा किया था. काशीबाई नवले मेडिकल कॉलेज और जनरल अस्पताल, निदेशक अरविंद भोरे ने कहा, उन्होंने (पूजा) 2007 में प्रवेश लिया. उन्हें सीईटी के माध्यम से प्रवेश मिला, जहां उन्होंने आरक्षण के कुछ प्रमाण पत्र दिए. उन्होंने जाति प्रमाण पत्र, जाति वैधता और नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र दिया. उन्होंने मेडिकल फिटनेस का प्रमाणपत्र भी जमा किया, जिसमें किसी तरह की फिटेनस गड़बड़ी का जिक्र नहीं है. पिछले हफ्ते केंद्र ने खेडकर की यूपीएससी उम्मीदवारी को सत्यापित करने और दो सप्ताह में एक रिपोर्ट सौंपने के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया है.
पूजा के माता-पिता की तलाश में पुलिस
वहीं, पुणे पुलिस पूजा के माता-पिता की तलाश कर रही है. उनके खिलाफ किसानों की जमीन पर कब्जा करने के बाद धमकाने का अलग आपराधिक मामला दर्ज किया गया है. पूजा की मां का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. इसमें वो पिस्तौल लहराकर धमकाते देखी जा रही थीं. पुलिस ने खेडकर दंपति और पांच अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. पूजा खेडकर की मां मनोरमा खेडकर गांव की सरपंच हैं. पुणे पुलिस ने रविवार को पूजा खेडकर की लग्जरी कार ऑडी को जब्त कर लिया है. इस कार पर वो अवैध रूप से लाल-नीली बत्ती लगाकर चलती थीं.
कैसे आईएएस बन गईं पूजा खेडकर?
- पूजा खेडकर ने दृष्टिबाधित श्रेणी से यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की है और एक प्रमाण पत्र जमा किया है कि उन्हें मानसिक बीमारी है. इसी आधार पर पूजा खेडकर को विशेष रियायत मिली और वो आईएएस बन गईं. यदि उन्हें यह रियायत नहीं मिलती तो प्राप्त अंकों को देखते हुए उनके लिए आईएएस बनना संभव नहीं होता.
- जब पूजा खेडकर को आईएएस रैंक मिली तो यूपीएससी ने उनकी मेडिकल परीक्षा कराने का फैसला किया. हालांकि, पूजा ने छह बार मेडिकल जांच में शामिल होने से इनकार कर दिया.
- सबसे पहले उनकी मेडिकल जांच 22 अप्रैल 2022 को दिल्ली के एम्स अस्पताल में कराने का फैसला लिया गया. लेकिन पूजा खेडकर ने खुद को कोरोना पॉजिटिव होने का कारण बताकर जाने से इनकार कर दिया.
- फिर 26 मई 2022 को एम्स अस्पताल में और 27 मई 2022 को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में जाने के लिए कहा गया, लेकिन कई बार बुलाए जाने के बावजूद पूजा मेडिकल टेस्ट के लिए नहीं गईं.
- जुलाई को उन्हें दोबारा एम्स बुलाया गया, लेकिन वो नहीं गई. 26 अगस्त 2022 को पूजा एम्स अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए तैयार हुईं. वहां उन्हें 2 सितंबर को एमआरआई टेस्ट के लिए उपस्थित होने के लिए कहा गया.
- इस दिन न्यूरो-ऑप्थमोलॉजिस्ट की मौजूदगी में पूजा की जांच की जानी थी कि किस वजह से आंखों की रोशनी चली गई. हालांकि, एम्स अस्पताल के ड्यूटी ऑफिसर के कई प्रयासों के बावजूद पूजा ने एमआरआई नहीं करवाई.
- फिर 25 नवंबर 2022 को जब पूजा से दोबारा इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने फिर इनकार कर दिया.
- लेकिन फिर वो एक एमआरआई सेंटर से रिपोर्ट लेकर आईं और यूपीएससी को सौंप दीं. हालांकि, यूपीएससी ने इस पर आपत्ति जताई और पूजा के चयन को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण यानी कैट में चुनौती दी. फिर 23 फरवरी 2023 को कैट ने पूजा खेडकर के खिलाफ फैसला सुनाया.
- उसके बाद ऐसा क्या हुआ कि पूजा खेडकर द्वारा जमा किया गया एमआरआई प्रमाणपत्र स्वीकार कर लिया गया और उनकी नियुक्ति वैध कर दी गई और उन्हें आईएएस का दर्जा दिया गया, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है.
2020 से 2023 के बीच सिर्फ एक साल बढ़ी पूजा की उम्र
दस्तावेजों से पता चलता है कि पूजा खेडकर द्वारा 2020 और फिर 2023 में केंद्रीय अपीलीय ट्रिब्यूनल को विवरण दिए गए. इसमें तीन साल के अंतराल के बावजूद सिर्फ एक साल आयु बढ़ना दिखाया गया है. हालांकि, खेडकर ने अपनी बेंचमार्क डिसेबिलिटी साबित करने के लिए कोई टेस्ट नहीं कराया. यूपीएससी ने उनके चयन को केंद्रीय अपीलीय न्यायाधिकरण (कैट) में चुनौती दी थी, जिसने फरवरी 2023 में उनके खिलाफ फैसला सुनाया था. खेडकर ने 2020 और 2023 के कैट आवेदन फॉर्म में खुद के लिए बेंचमार्क विकलांगता वाले व्यक्तियों के लिए ऊपरी आयु सीमा में छूट मांगी है.