मुंबई न्यायालय पहुंची 62 वर्षीय महिला ने न्याय दिलाने की गुहार लगाई. 62 वर्षीय महिला के मुताबिक वो पिछले 45 साल से पति के उत्पीड़न का शिकार हो रही है. पीड़ित महिला ने कोर्ट को बताया कि उसकी शादी 1975 में चंडीगढ़ में हुई थी. इस दंपति के एक बेटा-बेटी हैं, जो अपने- अपने परिवारों के साथ अमेरिका में रहते हैं. महिला के मुताबिक उसे शादी के बाद से ही पति की ओर से शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा.
महिला ने कोर्ट से कहा कि 'पति का माइंडसेट ऐसा रहा है कि वो हर वक्त अपशब्दों का इस्तेमाल करते रहता है. छह साल पहले वो रिटायर हुआ, उसके बाद वो दिन की शुरुआत ही अपशब्दों और गालियों से करता है. महिला ने ये भी आरोप लगाया कि उसके पति के बर्ताव की वजह से ही उसके बेटा-बेटी ने उनसे मिलना छोड़ दिया. वो कभी भारत आते भी हैं तो घर नहीं आते.' महिला ने कोर्ट से गुहार लगाई कि वो लगातार मानसिक उत्पीड़न और पीड़ा को और बर्दाश्त नहीं कर सकती. महिला के मुताबिक वो हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित है और उसकी सर्जरी भी हो चुकी है. महिला ने बताया कि 4 साल पहले उसने पति से अलग रहने का फैसला किया. उधर, पति ने पत्नी के सभी आरोपों को खारिज किया और कहा कि उसे झूठ बोलने की आदत है.
मुंबई कोर्ट की ओर से कहा गया कि दोनों पक्षों के आरोप सुने जा सकते हैं और ट्रायल के वक्त इस पर फैसला लिया जाएगा. हालांकि जज इमरान आर मार्चिया ने ऑब्जर्वेशन दिया कि 'मैं नहीं समझता कि किसी महिला के लिए अलग रहने का कारण उसके पति की तरफ से बुरे बर्ताव के अलावा कुछ और हो सकता है. पहली नजर में रिकॉर्ड दिखाता है कि याचिकाकर्ता घरेलू हिंसा की पीड़ित है.' इस दंपति के मुंबई में कई घर हैं, जिनमें से एक में पति रहता है. पत्नी ये घर छोड़कर दूसरे घर में रहने लगी. कोर्ट ने पति और पत्नी दोनों के फाइनेंशियल रिकार्ड्स को भी देखा. जबकि पति की ओर से पत्नी को 35,000 रुपए महीना गुजारा भत्ता देने की बात की गई, लेकिन पत्नी ने इसके लिए 75,000 रुपए महीना की मांग की. मजिस्ट्रेट कोर्ट ने रिटायर्ड मर्चेंट नेवी अधिकारी को पत्नी को 40,000 रुपए महीना गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है.