मुंबई पुलिस के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है. मुंबई पुलिस ने डुप्लीकेट गोल्ड फ्रॉड का भंडाफोड़ करते हुए तीन को गिरफ्तार किया है. गिरोह ने सीनियर सिटीजन से 20 लाख का फ्रॉड किया था. डुप्लीकेट गोल्ड एक्सचेंज फ्रॉड सामने आने के बाद से मुंबई पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और अभी तीन लोग लापता हैं.
दरअसल गिरोह ने एक शख्स से ऊंची कीमतों के सोने का वादा करके बदले में नकली सोना दे दिया था. बुजुर्ग व्यक्ति के साथ करीब 20 लाख रुपये की ठगी की थी. इस मामले को एलटी मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था. 70 वर्षीय शिकायतकर्ता के बाद यह धोखाधड़ी सामने आई. शिकायत में बुजुर्ग शख्स ने बताया कि दक्षिण मुंबई के झवेरी बाजार में एक जौहरी की दुकान थी वहां आरोपी ने अपना सोना बेचने के लिए उनसे संपर्क किया था.
पहले भी दे चुके हैं ऐसी घटनाओं को अंजाम
पुलिस ने धोखाधड़ी की धाराओं के तहत एक महिला और उनके कई रिश्तेदारों (एक अपराधी को शरण देने के लिए) सहित छह आरोपियों पर मामला दर्ज किया था. एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, ये सभी अपराधी एक ही परिवार के सदस्य हैं और कुछ उनके रिश्तेदार भी शामिल हैं. मुंबई से पहले छत्तीसगढ़, गुजरात और महाराष्ट्र कुछ ऐसे राज्य हैं जहां इस गिरोह ने लोगों को ठगा है. महाराष्ट्र के भीतर ही, रायगढ़, जलगांव, कोल्हापुर, वर्धा, नवी मुंबई और शहर के उपनगर कुछ ऐसे स्थान हैं जहां उन्होंने ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया है.
पुलिस की स्पेशल टीम ने 3 को किया अरेस्ट
मुंबई जोन 2 के डीसीपी अभिनव देशमुख की देखरेख और वरिष्ठ निरीक्षक ज्योति देसाई की निगरानी में खोजी अधिकारियों की एक टीम ने तीन आरोपियों की तेजी से गिरफ्तारी की. नाम न छापने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि वे कपड़े बेचने का नाटक करते हुए मुंबई शहर के क्षेत्रों में सर्वेक्षण करते थे. इस गिरोह का इरादा ही था कि वो बुजुर्ग लोगों को निशाना बनाएं. गिरोह के लोगों की कुछ गहने की दुकान के मालिकों से भी दोस्ती थी. गिरोह के कुछ आरोपी नागपुर के रहने वाले हैं लेकिन छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार-भाटापारा जिले और भारत के अन्य हिस्सों में बहुत सक्रिय हैं.
गिरफ्तार आरोपियों में रवि, धर्म कलानी और शंकर भट हैं, जबकि नारायण बघेल, उसका दामाद सुभाष सलात और मीना राठौड़ फरार हैं. यह पहली बार है जब इन आरोपियों का पता लगाया गया है और उन्हें गिरफ्तार किया गया है.
ऐसे करते थे फ्रॉड
पुलिस अधिकारी ने बताया कि इन लोगों ने पहले पीड़ितों (बुजुर्ग लोगों) को यह भरोसा दिलाया कि वे गरीब मजदूर हैं, जो खुदाई का काम करते हैं. ऐसे में उन्होंने बुजुर्ग को लाखों की कीमत के नकली गहने बेच दिए. वरिष्ठ नागरिक ने इन लोगों से डुप्लीकेट सोने का हार खरीदा और धोखा खा गए. बुजुर्ग ने बताया कि उन लोगों के बोलने और बातचीत करने की आदिवासी शैली ने लोगों को विश्वास दिलाया कि वे मजदूर हैं.