कोरोना संकट के बीच अब ब्लैक फंगस नई समस्या के रूप में सामने आया है और देश के कई राज्यों में यह मामला गंभीर होता जा रहा है. महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि ब्लैक फंगस की वजह से राज्य में अब तक करीब 90 लोगों की मौत हो चुकी है.
कोरोना से बुरी तरह से त्रस्त रहे महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने आज बुधवार को कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में लोग म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) से संक्रमित हो रहे हैं और अब तक करीब 90 लोगों की इस वजह से मौत हो चुकी है. उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 1,500 लोग इससे संक्रमित हैं. हमने केंद्र से एम्फो-बी इंजेक्शन जल्द मुहैया कराने की मांग की है.
स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि राज्य में ब्लैक फंगस के करीब 1,500 मामले थे. अकेले सिर्फ पुणे में ही म्यूकोरमायकोसिस के 270 मामले सामने आए. जबकि पड़ोसी राज्य गुजरात में स्थिति और खराब है. सिर्फ सूरत में 8 लोगों ने ब्लैक फंगस की वजह से अपनी दृष्टि खो दी है. जबकि पूरे गुजरात में कुल 40 मरीजों की आंखों की रोशनी चली गई. इस बीच राजस्थान सरकार ने ब्लैक फंगस के खतरे को देखते हुए अपने यहां इसे महामारी घोषित कर दिया है.
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राजस्थान में ब्लैक फंगस महामारी घोषित
वहीं, मध्य प्रदेश में ब्लैक फंगस के मरीज बढ़ने लगे हैं. और राज्य में इसके इलाज में इस्तेमाल होने वाले एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन की मांग बढ़ गई है. एमपी में ब्लैक फंगस के अब तक करीब 300 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं और इनमें सबसे ज्यादा मरीज इंदौर और भोपाल में हैं.
हालांकि ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल होने वाले एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन की बाजार में कमी हो गई है और मरीजों के परिजनों को दर-दर भटकना पड़ रहा है.
इसके अलावा दिल्ली, हरियाणा, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में भी ब्लैक फंगस मामले सामने आए हैं. कर्नाटक के बेंगलुरू में पिछले 15 दिनों में 75 मामले ब्लैक फंगस के आए. मैसूर के सरकारी अस्पतालों में 6 मामले देखने को मिले हैं, जबकि एक संदिग्ध मामला बेलागावी में भी सामने आया है. इसी तरह उत्तर प्रदेश में ब्लैक फंगस से कई लोग मर चुके हैं.