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पुणे पोर्श केस के नाबालिग आरोपी पर कैसे बालिग की तरह केस चलेगा? जानिए कानून और आगे की प्रक्रिया

पुणे पुलिस ने बुधवार को बताया कि कल्याणी नगर एक्सीडेंट मामले में आईपीसी की धारा 185 की बढ़ोतरी की है. नाबालिग को भी आज फिर किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा. इस नाबालिग के खिलाफ येरवडा पुलिस स्टेशन में धारा 185 के तहत शराब पीकर गाड़ी चलाने का नया मामला दर्ज किया गया है. इससे पहले उसके खिलाफ धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) का मामला दर्ज किया गया था.

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पुणे में पोर्श कार से नाबालिग लड़के ने बाइक सवार युवक-युवती को रौंद दिया.
पुणे में पोर्श कार से नाबालिग लड़के ने बाइक सवार युवक-युवती को रौंद दिया.

पुणे पोर्श एक्सीडेंट मामले में महाराष्ट्र पुलिस अब ताबड़तोड़ एक्शन ले रही है. बुधवार को पुलिस ने जांच के बाद इस केस में एक और धारा बढ़ा दी है. इसके साथ ही आरोपी नाबालिग को नया नोटिस दिया है. उसे आज जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा. आरोपी के पिता की भी आज कोर्ट में पेशी है. पुलिस का कहना है कि अपराध जघन्य है, इसलिए दोषियों को किसी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा. पुलिस ने इस मामले में सत्र न्यायालय में भी याचिका दायर की थी और वहां जमानत का विरोध किया था. हालांकि, सत्र न्यायालय ने किशोर न्याय बोर्ड में रिव्यू पिटीशन के लिए निर्देश दिए हैं.

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पुणे पुलिस ने बुधवार को बताया कि कल्याणी नगर एक्सीडेंट मामले में आईपीसी की धारा 185 की बढ़ोतरी की है. नाबालिग को भी आज फिर किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा. इस नाबालिग के खिलाफ येरवडा पुलिस स्टेशन में धारा 185 के तहत शराब पीकर गाड़ी चलाने का नया मामला दर्ज किया गया है. इससे पहले उसके खिलाफ धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) का मामला दर्ज किया गया था. उसके पिता के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है. हालांकि, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी को नाबालिग होने के आधार पर जमानत दे दी थी.

आरोपी पर कसता जा रहा है शिकंजा

पुलिस का कहना है कि येरवडा थाने में एफआईआर संख्या 306/24 में पोर्श एक्सीडेंट मामले में पहले धारा 185 नहीं लगाई गई थी. पहले एमवी एक्ट की धारा 184 (लापरवाही से गाड़ी चलाना) लगाई गई थी. अब प्रभाव में गाड़ी चलाने के लिए धारा 185 जोड़ी गई है. पुणे पुलिस का कहना है कि आरोपी नाबालिग को एक नया नोटिस भी दिया है. इसमें पुलिस ने आरोपी को बुधवार दोपहर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश होने और रिव्यू पिटीशन की सुनवाई का हिस्सा बनने के लिए बुलाया है. आरोपी के वकील प्रशांत पाटिल ने इस नोटिस की पुष्टि की है.

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JJ बोर्ड को आदेश की समीक्षा करने की सलाह

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान भी आया है. उन्होंने बताया कि पुलिस ने JJB के आदेश को चुनौती देते हुए ऊपरी अदालत में एक आवेदन दायर किया था. हालांकि अदालत ने पुलिस को फिर से बोर्ड के पास जाने और आदेश में संशोधन के लिए याचिका दायर करने के लिए कहा है. अदालत ने यह भी कहा कि अगर जेजे बोर्ड अपने आदेश की समीक्षा नहीं करता है तो पुलिस ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है.

पुलिस क्यों बाल सुधार गृह भेजने की मांग कर रही? 

पुणे पुलिस ने मंगलवार को किशोर न्याय बोर्ड में जो रिव्यू पिटीशन दायर की है, उसमें किशोर को ऑब्जर्वेशन होम भेजने की मांग की है. किशोर न्याय अधिनियम की धारा 104 के अनुसार, पुणे पुलिस ने किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष रिव्यू पिटीशन में कहा है कि आरोपी नाबालिग को ऑब्जर्वेशन होम भेजा जाए या फिर रिमांड पर दिया जाए. इस याचिका पर बुधवार को फिर से बहस होगी. पुणे पुलिस मांग कर रही है कि किशोर को उसके माता-पिता की निगरानी से दूर किया जाए. क्योंकि माता-पिता उस पर नजर रखने में विफल रहे हैं. पुलिस ने किशोर न्याय अधिनियम के तहत एफआईआर की धारा 75 (उपेक्षा) और 77 (नशीला पदार्थ देना या उस तक पहुंच होना) का हवाला भी दिया. 

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पिता पर लगाए जानबूझकर लापरवाही के आरोप

दरअसल, पुलिस ने आरोपी के पिता के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 और 77 और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. धारा 75 किसी बच्चे की जानबूझकर उपेक्षा करने से संबंधित है. जबकि धारा 77 किसी बच्चे को नशीली शराब या ड्रग्स की आपूर्ति करने से संबंधित है. इसके अलावा, आरोपी लड़के के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) और मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है. घटना के संबंध में दर्ज एफआईआर के अनुसार, नाबालिग के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था. यह जानते हुए भी पिता ने बेटे को कार दे दी, जिससे उसके बेटे की जान खतरे में पड़ गई. इसके साथ ही पिता ने बेटे को पार्टी में शामिल होने की अनुमति दे दी, जबकि वो जानते थे कि उनका बेटा शराब का सेवन करता है.

आरोपी नाबालिग के पिता की भी आज कोर्ट में पेशी

बताते चलें कि पुणे में 17 साल के लड़के ने तीन दिन पहले शराब के नशे में अपनी पोर्शे कार से बाइक सवार दो इंजीनियरों को रौंद दिया था. हादसे में दोनों (लड़का-लड़की) की मौत हो गई थी. मरने वालों की पहचान अनीश अवधिया (24 साल) और अश्विनी कोष्टा (24 साल) के रूप में हुई है. दोनों मध्य प्रदेश के रहने वाले थे और पुणे में काम करते थे. इस मामले में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने कुछ शर्तों के साथ आरोपी नाबालिग को रिहा कर दिया. पुलिस ने अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनमें बार के दो मैनेजर, बार का मालिक, होटल कर्मचारी और आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल का नाम शामिल है. आरोपी के पिता को भी बुधवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा.

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पुलिस बोली- जघन्य अपराध किया, छोड़ेंगे नहीं

इससे पहले पुणे के पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने कहा, रविवार को ही हमने कोर्ट (जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड) के समक्ष एक आवेदन दायर किया था और आरोपी (किशोर) पर वयस्क के तौर पर मुकदमा चलाने और अपराध जघन्य होने के कारण उसे निगरानी गृह में भेजने की अनुमति मांगी थी, लेकिन वहां से याचिका खारिज कर दी गई. अब हम उसी याचिका के साथ ऊपरी अदालत (सत्र न्यायालय) का दरवाजा खटखटाया है. बार के सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि आरोपी वहां बैठकर दोस्तों के साथ शराब पी रहा था. इसमें भी कोई शक नहीं है कि आरोपी किशोर शराब पीकर कार चला रहा था. 

क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है जांच

पुलिस कमिश्नर ने आगे कहा, हम इन सभी तथ्यों को कोर्ट में जमा करेंगे. हमने किशोर न्याय अधिनियम के तहत उसके पिता के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इसके अलावा, नाबालिग को शराब पिलाए जाने पर बार मालिकों के खिलाफ भी FIR दर्ज की है. हमने इन मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी है.

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पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की?

इस बीच, पुणे की एक अदालत ने मंगलवार को मामले में तीन आरोपियों बार मालिक और रेस्टोरेंट्स के दो मैनेजर को 24 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है. यहां आरोपी नाबालिग ने अपने दोस्तों के साथ बैठकर शराब पी थी, उसके बाद वो कार लेकर बाहर निकला था. आरोपी कोसी रेस्टोरेंट के मालिक के बेटे नमन प्रल्हाद भूतड़ा, उसके मैनेजर सचिन काटकर और ब्लैक क्लब होटल के मैनेजर संदीप सांगले को अदालत में पेश किया गया था. पुलिस ने  सात दिन की कस्टडी की मांग की थी. पुलिस ने तर्क दिया कि आरोपियों के स्वामित्व या प्रबंधन वाले बार-रेस्टोरेंट में आरोपी लड़के और उसके दोस्तों को उनकी कम उम्र (शराब पीने की कानूनी उम्र 21 वर्ष) की पुष्टि किए बिना शराब परोसी. पुलिस ने अदालत को बताया कि उन्होंने कोसी रेस्टोरेंट के मालिक प्रल्हाद भुटाडा को नोटिस भेजा है. जरूरत पड़ने पर उनसे पूछताछ के लिए उपलब्ध रहने के लिए कहा है. पुलिस के अनुसार, हालांकि प्रल्हाद भूतड़ा प्रतिष्ठान का मालिक है, लेकिन वो होटल के डेली मैनेजमेंट का काम नहीं देखता है. वहीं, पुणे जिला कलेक्टर के आदेश पर राज्य उत्पाद शुल्क विभाग ने दोनों प्रतिष्ठानों को सील कर दिया है. पुलिस कमिश्नर कुमार ने बताया कि एक अन्य आरोपी जयेश बोनकर को भी गिरफ्तार कर किया गया है. ये ब्लैक क्लब होटल में कर्मचारी है

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घटना के बाद क्या कर रहा है प्रशासन?

वहीं, कल्याणी नगर हादसे के बाद पुणे नगर निगम अलर्ट मोड पर है. नगर निगम ने कोगेगांव पार्क में 2 और अवैध पबों पर कार्रवाई की. अवैध अतिक्रमण के उल्लंघन पर वाटर्स और ओरिला दोनों पबों को ध्वस्त कर दिया गया है. पुणे नगर निगम का कहना है कि शहर के अन्य सभी पब और बार को भी नोटिस भेजा जाएगा.

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डिप्टी सीएम बोले- जरूरत पड़ी तो हम हाईकोर्ट भी जाएंगे

उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, लोगों में गुस्सा और नाराजगी है. मैंने पुलिस विभाग के साथ बैठक की. हम इस बात का ध्यान रख रहे हैं कि रोकथाम के लिए क्या किया जा सकता है. किशोर न्याय बोर्ड में पुलिस की एफआईआर में आईपीसी की धारा 304 का जिक्र है. फडणवीस का कहना था कि किशोर न्याय बोर्ड ने जो कार्रवाई की, वो हमारे लिए चौंकाने वाली है. हम ऊपरी अदालत जाएंगे और हर चीज की समीक्षा करेंगे. हम अनंतिम आदेश की उम्मीद है. यदि सत्र न्यायालय से राहत नहीं मिलती है तो हम हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे. हमने नाबालिग के पिता (रियल एस्टेट कारोबारी विशाल अग्रवाल) के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है. लेकिन किसी को नरमी से बरी करना स्वीकार्य नहीं होगा. हम सभी बार और रेस्टोरेंट में प्रभावी अभियान चलाएंगे. प्रशासन द्वारा दिए गए लाइसेंसों को स्थानीय अथॉरिटी द्वारा संशोधित और पुन: जांचा जाएगा. साथ ही एक्सपायर हो चुके लाइसेंस भी जल्द ही टर्मिनेट किए जाएंगे. हम इसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे.

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डिप्टी सीएम ने बताया, आरोपी से क्यों वयस्क जैसा बर्ताव करना चाहिए?

डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस का कहना था कि पुलिस ने तत्काल मामले में आईपीसी की धारा 304 लगाई और किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष रिमांड याचिका में इसका उल्लेख किया कि चूंकि किशोर 17 साल और आठ महीने का है, इसलिए उसके साथ वयस्क जैसा व्यवहार किया जाना चाहिए. 2012 में निर्भया मामले (दिल्ली के) के बाद कानून में एक संशोधन किया गया था, जिसमें कहा गया था कि जघन्य अपराधों में 16 वर्ष से ऊपर के किशोरों (आरोपियों) पर वयस्कों के रूप में मुकदमा चलाया जाना चाहिए. इस बिंदु को ध्यान में रखते हुए पुणे पुलिस ने अनुमति मांगी है, उसे किशोर (पुणे दुर्घटना मामले में) एक वयस्क के रूप में मानने की अनुमति दें. हालांकि, बोर्ड ने एक अलग रुख अपनाया था. 

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फडणवीस ने कहा, पुलिस ने अपने आदेश में संशोधन के लिए जेजेबी से संपर्क किया है और बुधवार तक फैसला आने की उम्मीद है. उन्होंने कहा, पुलिस मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए जो भी करना होगा, वो करेगी. फडणवीस ने कहा, पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है और वो किसी को जमानत मिलना बर्दाश्त नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि पुलिस को शराब परोसने वाले पब-बार के लिए बनाए गए नियमों को लागू करने के लिए कहा गया है. नशे में गाड़ी चलाने पर अंकुश लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं.

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