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आज दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है. आजकल योग के कई सारे फॉर्म आ गए हैं. ऐसा ही एक है साउंड एंड वाइब्रेशन योगा. पुणे में इन दिनों साउंड एंड वाइब्रेशन योगा बहुत पॉपुलर हो रहा है. इस तरह के योगा में तिब्बती मेडिटेशन बाउल के जरिए साउंड और वाइब्रेशन क्रिएट किया जाता है, जिसे सिंगिंग बाउल्स भी कहा जाता है.
अल्पना अशोक भोकारे सर्टिफाइड योगा टीचर हैं. अल्पना पिछले 10 साल से साउंड और वाइब्रेशन योगा सिखा रही हैं. वो बताती हैं, तिब्बती सिंगिंग बाउल के जरिए साउंड और वाइब्रेशन का किसी व्यक्ति के शरीर पर बहुत ही सुखद असर पड़ता है.
यहां आईं गौरी मेहता बताती हैं कि "जब आप आंखें बंद करके लेटते हैं तो बाउल से आने वाला साउंड आपको मंदिर की घंटी बजने का एहसास दिलाता है, लेकिन ये आवाज आपके शरीर के अंदर से ही आती है और ये मन और शरीर पर बहुत शांतिपूर्ण प्रभाव डालती है. इससे शरीर के हर हिस्से में अलग-अलग फीलिंग आती हैं."
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सुचेता नाइक भी यहां योगा करने आती हैं. वो बताती हैं कि जिस दिन से उन्होंने साउंड और वाइब्रेशन योगा करना शुरू किया है, उस दिन से उन्हें अच्छी नींद आ रही है और जब वो जागती हैं तो पूरी तरह से फ्रेश फील करती हैं.
ऐसा नहीं है कि इस योग को सिर्फ युवा ही कर रहे हैं, बल्कि छात्रों में भी इसका क्रेज बढ़ रहा है. एक स्टूडेंट बताती है कि कैसे वो लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन क्लास करते-करते थक जाती थी, लेकिन साउंड और वाइब्रेशन योगा करने के बाद वो पूरी तरह से तरोताजा महसूस करती हैं. 12 साल की परिनिष्ठा कहती हैं कि अब वो हर दिन 45 मिनट की योगा क्लास अटेंड करती हैं.
योगा टीचर अल्पना भोकारे बताते हैं कि इस तरह के योगा से माइग्रेशन, डिप्रेशन, स्ट्रेस जैसी मानसिक बीमारियों को काबू में किया जा सकता है.