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मैगी नूडल्स केस: नेस्ले के अधिकारियों को बड़ी राहत, बॉम्बे हाई कोर्ट ने रद्द किया आपराधिक मामला

नेस्ले इंडिया के अधिकारियों की ओर से पेश हुए एडवोकेट एसवी मनोहर ने तर्क दिया कि गाजियाबाद की लैब परीक्षण के समय NABL से मान्यता प्राप्त नहीं थी. FSS अधिनियम की धारा 43 के तहत, केवल NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं ही ऐसे परीक्षण कर सकती हैं. गाजियाबाद लैब को 15 दिसंबर 2016 को NABL मान्यता मिली, जबकि नेस्ले के सैंपल का परीक्षण उससे पहले किया गया था, जिससे उसकी वैधता संदिग्ध हो गई.

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बॉम्बे हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
बॉम्बे हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने नेस्ले इंडिया लिमिटेड के अधिकारियों के खिलाफ मैगी इंस्टेंट नूडल्स से जुड़े आपराधिक मामले को खारिज कर दिया है. यह मामला 4 अप्रैल 2016 को खाद्य सुरक्षा अधिकारी की ओर से अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, नागपुर के समक्ष दायर किया गया था.

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जस्टिस उर्मिला जोशी फाल्के की बेंच ने फूड सैंपल टेस्टिंग में प्रक्रिया से संबंधित खामियों को देखते हुए यह आदेश दिया. बेंच नेस्ले इंडिया के नागपुर और गोवा के अधिकारियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

क्या है पूरा मामला?

खाद्य सुरक्षा अधिकारी किरण रंगास्वामी गेडाम ने 2016 में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें नेस्ले इंडिया पर खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (FSS Act), 2006 के कई प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था.

शिकायत के अनुसार, 30 अप्रैल 2015 को नागपुर के पास नेस्ले इंडिया के लॉजिस्टिक हब की जांच की गई थी, जहां से मैगी इंस्टेंट नूडल्स के सैंपल लिए गए थे. सैंपल को पुणे स्थित स्टेट पब्लिक हेल्थ लैब में जांचा गया, जहां इसे सुरक्षित पाया गया. हालांकि, खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने दूसरी राय के लिए सैंपल को गाजियाबाद स्थित रेफरल फूड लैब भेजा.

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गाजियाबाद लैब की 31 दिसंबर 2015 की रिपोर्ट में पाया गया कि नूडल्स में ड्राई ऐश (Dry Ash) की मात्रा अधिक थी और नाइट्रोजन का स्तर कम था, जो निर्धारित मानकों का उल्लंघन था. इसी रिपोर्ट के आधार पर नेस्ले अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया.

गाजियाबाद लैब के पास नहीं थी NABL की मान्यता

नेस्ले इंडिया के अधिकारियों की ओर से पेश हुए एडवोकेट एसवी मनोहर ने तर्क दिया कि गाजियाबाद की लैब परीक्षण के समय NABL से मान्यता प्राप्त नहीं थी. FSS अधिनियम की धारा 43 के तहत, केवल NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं ही ऐसे परीक्षण कर सकती हैं. गाजियाबाद लैब को 15 दिसंबर 2016 को NABL मान्यता मिली, जबकि नेस्ले के सैंपल का परीक्षण उससे पहले किया गया था, जिससे उसकी वैधता संदिग्ध हो गई.

इसके अलावा फूड सैंपल की शेल्फ लाइफ समाप्त हो चुकी थी, क्योंकि यह प्रोडक्ट मार्च 2015 में बना था और केवल 9 महीने तक ही इस्तेमाल किया जा सकता था. इसके अतिरिक्त, बेंच ने अदालत द्वारा आरोपियों को समन जारी करने के औपचारिक आदेश की कमी जैसी प्रक्रियात्मक खामियों पर भी गौर किया.

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