महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Governor Bhagat Singh Koshyari) के शिवाजी महाराज पर दिए गए बयान पर राज्य में बवाल मचा हुआ है. महाराष्ट्र विधानसभा बजट सत्र (Maharashtra Assembly Budget Session) के दौरान राज्यपाल के बयान पर एनसीपी विधायकों ने नाराजगी जाहिर की.
गुरुवार को बजट सत्र शुरू होते ही महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के विधायकों ने कोश्यारी के खिलाफ नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया. राज्यपाल के बयान पर विरोध जाहिर करने के लिए एनसीपी विधायक संजय दौंड ने 'शीर्षासन' भी किया.
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क्या बोले थे राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी?
दरअसल, एक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कहा था, 'चाणक्य बिना चंद्रगुप्त को कौन पूछेगा? इसी प्रकार स्वामी समर्थ के बिना शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) को कौन पूछेगा? जीवन में गुरु का काफी महत्व होता है.' कोश्यारी के इस बयान के बाद महाराष्ट्र में राजनीति तेज हो गई है. एनसीपी विधायक, सांसद अपने-अपने तरीकों से राज्यपाल कोश्यारी पर निशाना साध रहे हैं.
सदन में सिर्फ 22 सेकेंड ही बोल पाए राज्यपाल
छत्रपति शिवाजी के बयान के बाद महाराष्ट्र विधानसभा में भी काफी हंगामा हुआ. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) ने सत्र के पहले दिन अपना भाषण बीच में ही बंद कर दिया और सदन से चले गए.राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी जैसे ही अभिभाषण के लिए सदन में आए, सत्ता पक्ष के नेताओं ने 'छत्रपति शिवाजी महाराज की जय' के नारे लगाए. इसके बाद राज्यपाल ने सिर्फ 22 सेकेंड में पटल पर भाषण खत्म कर दिया. राज्यपाल के भाषण में महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले के नामों का उल्लेख करने के बाद ही संबोधन खत्म हो गया.
महाविकास अघाड़ी के विधायकों द्वारा हंगामा करने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शांति की अपील की लेकिन उसके बाद बीजेपी विधायकों ने फिर से शोर शराबा करना शुरू कर दिया. इसके बाद राज्यपाल ने भाषण छोड़ दिया.
सुप्रिया सुले ने किया ट्वीट
सांसद सुप्रिया सुले (Supriya Sule) ने राज्यपाल को बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) की औरंगाबाद खंडपीठ की उस ऑडर कॉपी ट्वीट किया है. जिसमें यह कहा गया है कि शिवाजी महाराज और स्वामी समर्थ रामदास के बीच कोई गुरु और शिष्य का रिश्ता था.