महाराष्ट्र संकट के बीच मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने एक बार फिर बागियों को मनाने का प्रयास किया है. उनकी तरफ से एक भावुक संदेश जारी किया गया है. उस संदेश में उद्धव कह रहे हैं कि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सकता है. विधायकों को सिर्फ उनसे बात करने की जरूरत है.
संदेश में वे कहते हैं कि परिवार के मुखिया के नाते मुझे आप लोगों की चिंता है. आप लोगों को कुछ दिनों से कैद करके गुवाहाटी में रखा गया है. आप लोगों के बारे में रोज नई जानकारी मेरे सामने आती है. आप में से कई मेरे संपर्क में हैं. आप लोग दिल से अभी भी शिवसेना के साथ हैं.
उद्धव ने आगे कहा कि मुखिया के नाते में यह ही कह सकता हूं कि अभी बहुत देर नहीं हुई है. आप लोग मुंबई आकर मेरे सामने बैठें और शंकाओं को दूर करें. हम लोग एकसाथ बैठक जरूर कोई रास्ता निकाल लेंगे. आगे कहा गया है कि शिवसेना ने जो आदर सम्मान आपको दिया है वह कहीं और नहीं मिलेगा.
इससे पहले भी उद्धव ठाकरे ऐसे ही भावुक अंदाज में बागियों से अपील कर चुके हैं. शुरुआत में उनकी एकनाथ शिंदे से भी बात हुई थी. लेकिन तब शिंदे की तरफ से साफ कर दिया गया था कि बातचीत का समय खत्म हो चुका है और अब कुछ नहीं हो सकता. अभी के लिए राज्य में स्थिति महा विकास अघाडी सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. आंकड़ों के लिहाज से सरकार अल्पमत में है.
अभी तक शिंदे गुट की तरफ से कोई बड़ी पहल नहीं की गई है. अटकलें जरूर हैं कि देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे की मुलाकात हो सकती है. कहा तो ये भी जा रहा है कि शिंदे दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से भी बात कर सकते हैं. ऐसे में सियासी हलचल तेज है, आने वाले दिनों में कोई बड़ा नाटकीय मोड़ देखने को मिल सकता है.
वैसे एक खबर तो ऐसी भी सामने आई कि सीएम उद्धव ठाकरे ने अपनी सरकार बचाने के लिए देवेंद्र फडणवीस से फोन पर बात की. लेकिन इस कयास पर ज्यादा चर्चा हो पाती, उससे पहले ही शिवसेना के जनसंपर्क प्रमुख हर्शल प्रधान ने अटकलों पर विराम लगा दिया. उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे की तरफ से फडणवीस से सरकार बचाने के लिए कोई बात नहीं की गई है.
वर्तमान स्थिति की बात करें तो सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बागी विधायकों को बड़ी राहत दी गई है. सोमवार को दिए फैसले में कोर्ट ने डिप्टी स्पीकर के उस नोटिस पर रोक लगा दी थी जहां पर बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने की बात थी. अभी 11 जुलाई तक उनको वक्त दे दिया गया है. अब इस बीच शिंदे गुट का अगला कदम क्या रहता है, वे सरकार बनाने की कोशिश करते हैं या फिर पूरी शिवसेना पर अपना कब्जे करने का प्रयास, इस पर सभी की नजर रहने वाली है.