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महाराष्ट्र बीते 3 दिनों से भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन का सामना कर रहा है. महाराष्ट्र के पुणे और कोंकण डिवीजनों में मूसलाधार बारिश हुई है, जिससे कई इलाकों में भूस्खलन और बाढ़ की वजह से त्रासदी मची है. राज्य सरकार के मुताबिक महाराष्ट्र में बारिश से संबंधित घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 112 हो गई है, वहीं 99 लोग अब भी लापता हैं.
राज्य और केंद्र सरकार ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है. इस बीच, एनडीआरएफ ने महाराष्ट्र में बचाव प्रयासों के लिए अपनी कई टीमों को तैनात किया है. बाढ़, बारिश और भूस्खलन की घटनाओं में 53 लोग घायल भी हो गए हैं. अकेले रायगढ़ जिले में 21 से 24 जुलाई के बीच 52 मौतें हुईं हैं. बारिश की वजह से 3,000 से ज्यादा मवेशी भी मारे गए हैं, जिनमें से अधिकांश सतारा जिले में हैं.
रत्नागिरी जिले में पिछले तीन दिनों में बारिश के चलते 21 लोगों की मौत हुई है. वहीं सतारा में 22 लोग जान गंवा चुके हैं. ठाणे में 12 लोगों की मौत हुई है, तो कोल्हापुर में 7 लोग जान गंवा चुके हैं. मुंबई में 4, सिंधुदुर्ग में 2 और पुणे में एक शख्स की मौत हुई है. वहीं रायगढ़ में 53, सतारा में 27, रत्नागिरी में 14, ठाणे में तीन और सिंधुदुर्ग और कोल्हापुर में एक-एक लोग लापता हैं. कुल 99 लोग बारिश जनित घटनाओं में लापता हैं.
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1,35,313 लोगों का हुआ रेस्क्यू
महाराष्ट्र में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 1,35,313 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. इसमें पश्चिमी महाराष्ट्र के सांगली जिले के 78,111 और कोल्हापुर जिले के 40,882 लोग शामिल हैं. कोंकण के चिपलून, खेड़ और महाड जैसे बाढ़ प्रभावित शहरों में प्रशासन, पानी और बिजली की आपूर्ति बहाल करने के साथ-साथ निवासियों के लिए भोजन और दवाओं की व्यवस्था करा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों के साथ-साथ कुछ निजी प्रॉपर्टीज को भी शेल्टर और घायलों के प्राथमिक उपचार केंद्रों के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.
बचाव अभियान के लिए एनडीआरएफ की 34 टीमें तैनात
NDRF ने राज्य के तटीय क्षेत्रों में बचाव कार्यों के लिए 34 टीमों को तैनात किया है. एनडीआरएफ के प्रवक्ता का कहना है कि टीमों को राज्य प्रशासन के निर्देश के बाद मुंबई, रत्नागिरी, ठाणे, पालघर, रायगढ़, सतारा, सांगली, सिंधुदुर्ग, कोल्हापुर, पुणे और नागपुर के प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है. एनडीआरएफ की टीमों ने अब तक करीब 1,800 फंसे हुए लोगों को बचाया है और 87 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है. उन्होंने अब तक भूस्खलन स्थलों से 52 शव निकाले हैं. लापता लोगों की तलाश की जा रही है.
दिल्ली से रखी जा रही है नजर
एनडीआरएफ की हर टीम में करीब 47 कर्मी होते है. ये जवान जीवन रक्षक उपकरण, नावों, पेड़ और पोल कटर से लैस होते हैं. दिल्ली के एनडीआरएफ कंट्रोल रूम से महाराष्ट्र की पूरी स्थिति पर नजर रखी जा रही है. राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ तालमेल बैठाकर रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया जा रहा है.
राज्य और केंद्र सरकार ने मुआवजे का किया ऐलान
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने बारिश से संबंधित घटनाओं में प्रत्येक पीड़ित के परिजनों के लिए 5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की है. वहीं बीच, केंद्र सरकार ने आपदा में जान गंवाने वाले मृतक के परिवारों को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का वादा किया है.
IAF भी रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटा
शनिवार को, भारतीय वायु सेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए कमर कसी. हेलीकॉप्टर के जरिए वडोदरा से कोल्हापुर के 92 एनडीआरएफ कर्मियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचाया. तो कोलकाता से भी 100 कर्मियों को पुणे के लिए एयरलिफ्ट किया. इसके अलावा दो MI-17 हेलीकॉप्टरों के जरिए प्रभावित क्षेत्र का जायजा लेने के लिए एरियल सर्वे भी किया.
सतारा जिले में 22 लोग गंवा चुके हैं जान
महाराष्ट्र के सतारा जिले में बाढ़ और तीन जगहों पर हुए भूस्खलन से कम से कम 22 लोगों की मौत हो चुकी है. 20 लोग लापता हैं. पश्चिमी महाराष्ट्र के इस जिले के 379 गांव भारी बारिश से प्रभावित हुए हैं. 5,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. जिले में फिलहाल एनडीआरएफ की 3 टीमें तैनात हैं. जिला प्रशासन ने और टीमों की तैनाती की मांग की है.
रविवार को कैसा रहेगा महाराष्ट्र में मौसम?
मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक अगले 24 घंटों में पश्चिमी तट पर बारिश की तीव्रता कम होने की उम्मीद है. अधिकारियों ने कहा कि सांगली में कृष्णा नदी और कोल्हापुर में पंचगंगा में बाढ़ आ गई है, जबकि बारिश थम गई है. महाराष्ट्र सरकार पड़ोसी राज्य कर्नाटक के साथ समन्वय कर रही है जिससे, कोल्हापुर जिले में बाढ़ को कम करने के लिए अलमट्टी बांध से पानी समय पर छोड़ा जा सके.