महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर सियासी घमासान का दौर जारी है. शिवसेना और बीजेपी दोनों अपने-अपने कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं हैं और दोनों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दर पर दस्तक दी है. शिवसेना ने इस मामले में आरएसएस प्रमुख से दखल देने की मांग की है. वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को नागपुर आरएसएस मुख्यालय जाकर सरसंघचालक मोहन भागवत से मुलाकात की. ऐसे में अब महाराष्ट्र सरकार गठन की गेंद आरएसएस के पाले में है और देखना है कि मोहन भागवत इसमें क्या सियासी राह निकालते हैं?
बता दें महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव नतीजे आए हुए 13 दिन गुजर चुके हैं. इसके बावजूद भी बीजेपी और शिवसेना के बीच सियासी खींचतान जारी है. बीजेपी अपने पुराने स्टैंड पर कायम है और किसी भी सूरत में सीएम पद नहीं छोड़ना चाहती है. जबकि, शिवसेना मुख्यमंत्री पद को लेकर अपना दावा और 50-50 फॉर्मूले की शर्त रख रही है. इसी के चलते महाराष्ट्र में सरकार गठन का मामला अधर में लटका हुआ है.
शिवसेना को आरएसएस का सहारा
महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद पर खींचतान के बीच शिवसेना ने किशोर तिवारी ने सोमवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर दखल देने की मांग की है. शिवसेना नेता ने संघ प्रमुख से आग्रह किया है कि वे सरकार गठन को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मध्यस्थता कराएं, ताकि बीजेपी और शिवसेना के बीच जारी विवाद का आम सहमति से हल निकल सके. इतना ही नहीं शिवसेना ने देवेंद्र फडणवीस को व्यक्तिवादी बताया और नितिन गडकरी के जरिए गतिरोध को खत्म करने की बात कही है.
संघ और बीजेपी फूंक-फूंक पर रखना चाहते हैं कदम
शिवसेना के संघ के दर पर दस्तक देने के दूसरे दिन ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार रात नागपुर पहुंचे और आरएसएस मुख्यालय जाकर सरसंघचालक मोहन भागवत से मुलाकात की. फडणवीस संघ मुख्यालय में करीब डेढ़ घंटे तक रहे और माना जा रहा है कि इस दौरान उन्होंने संघ प्रमुख को को मौजूदा स्थिति और संभावित स्थितियों के बारे में जानकारी दी.
बैठक के बाद संघ और बीजेपी दोनों चुप्पी साधे हुए हैं. सीएम फडणवीस ने भी कोई बयान नहीं दिया और न ही संघ की ओर से कोई बात कही गई. सूत्रों की मानें तो बीजेपी और आरएसएस भी महाराष्ट्र में कोई खतरा मोल लेना नहीं चाहते हैं. यही वजह है कि अभी तक सरकार गठन की दिशा में बीजेपी ने किसी तरह की कोई जल्दबाजी नहीं की है.
सरकार गठन का क्या रास्ता निकालेगा संघ?
संघ का कहा बीजेपी टाल नहीं सकती तो शिवसेना भी आरएसएस की इच्छा के खिलाफ नहीं जा सकती है. ऐसे में शिवसेना और देवेंद्र फडणवीस की मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की सियासी राह निकालने की जिम्मेदारी संघ के कंधों पर आ गई है. ऐसे में अब देखना होगा कि आरएसएस महाराष्ट्र में सरकार गठन का कौन सा फॉर्मूला निकलता है, जिस पर बीजेपी और शिवसेना दोनों राजमंद नजर आएं?
बता दें कि महाराष्ट्र की कुल 288 विधानसभा सीटों में से बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली हैं. जबकि, 13 निर्दलीय भी जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे हैं. राज्य में सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी को 145 विधायक चाहिए.