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महाराष्ट्र में धर्म बदलकर दोहरा लाभ लेने वाले आदिवासियों पर होगी कार्रवाई, पहचान के लिए बनेगी समिति

महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने गुरुवार को बताया कि सरकार दोहरा लाभ लेने वाले आदिवासियों के मुद्दे पर एक अध्ययन समिति बनाएगी. ये समिति ऐसे लोगों की पहचान करेंगी, जो धर्म बदलकर अल्पसंख्यक और अनुसूचित जनजाति वर्ग का लाभ ले रहे हैं. धर्मांतरण से आदिवासियों की संस्कृति खोखली हो रही है.

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धर्म बदलकर दोहरा लाभ लेने वाले आदिवासियों के अध्ययन को बनेगी समिति (फाइल फोटो)
धर्म बदलकर दोहरा लाभ लेने वाले आदिवासियों के अध्ययन को बनेगी समिति (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र में अपना धर्म बदलकर दोहरा लाभ लेने वाले आदिवासियों के खिलाफ राज्य सरकार अब कार्रवाई करने जारी है. गुरुवार को मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने बताया कि सरकार एक समिति का गठन करने जा रही है. यह समिति उन आदिवासियों का अध्ययन करेगी, जो धर्म बदलकर अल्पसंख्यक और अनुसूचित जनजाति, दोनों ही वर्ग का लाभ उठा रहे हैं.

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उन्होंने गुरुवार को विधान परिषद में बोलते हुए कहा कि जो आदिवासी धर्म बदलकर अल्पसंख्यक समुदाय के साथ-साथ अनुसूचित जनजाति (एसटी) के सदस्यों के रूप में लाभ उठा रहे हैं, ऐसे लोगों की पहचान के लिए एक समिति बनाई जाएगी.

प्रलोभन देकर बदलवाया जा रहा है धर्म

भाजपा नेता ने दावा किया कि कई आदिवासियों को जबरदस्ती और प्रलोभन देकर धर्म बदलवाया जा रहा है. इससे आदिवासियों की संस्कृति पर संकट पैदा हो गया है. ऐसे दोहरे लाभ पाने वाले व्यक्तियों के मुद्दे का अध्ययन करने के लिए एक सेवानिवृत्त कुलपति की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी. इस समिति में सभी राजनीतिक दलों के सदस्य शामिल होंगे.

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सीएम और डिप्टी सीएम से करेंगे चर्चा

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मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने अपने जवाब के अंत में कहा कि वह इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के साथ चर्चा करेंगे और सदन को जानकारी देंगे. उन्होंने ये बातें बीजेपी विधायक निरंजन डारखरे और प्रवीण दरेकर के सवाल का जवाब देते हुए कहीं, जिसमें इस्लाम और ईसाई धर्म अपनाने वाले आदिवासियों को एसटी सूची से हटाने और उनसे आरक्षण लाभ वापस लेने की मांग की गई थी. 

कांग्रेस और BJP नेता में नोकझोंक

वहीं, इसी मुद्दे पर बोलते हुए भाजपा नेता और कांग्रेस विधायक कपिल पाटिल के बीच तीखी नोकझोंक हो गई. पाटिल ने कहा कि अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को यह तय करने का अधिकार है कि उन्हें किसकी पूजा करनी चाहिए और आरोप लगाया कि प्रस्तावित सूची से हटाने से धार्मिक भेदभाव होगा.

उन्होंने कहा, 'अगर आदिवासी हिंदू धर्म अपनाते हैं, तो यह स्वीकार्य हो जाता है. मगर, यदि वे इस्लाम, ईसाई धर्म या बौद्ध धर्म अपनाते हैं, तो इसे अस्वीकार्य माना जाता है.'

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