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महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव से पहले 'मराठी कार्ड' पर सियासी घमासान, जानें- क्या-क्या दांव आजमा रहीं पार्टियां

राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे दोनों ने अपनी-अपनी पार्टियों की ओर से आयोजित पुस्तक मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, ताकि मराठी गौरव के प्रति अपनी निष्ठा को प्रदर्शित कर सकें. वहीं, महायुति के सहयोगी दलों ने भी राज्य सरकार और विभिन्न संगठनों की ओर से मराठी विरासत से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया.

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महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव से पहले सियासी हलचल बढ़ गई है
महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव से पहले सियासी हलचल बढ़ गई है

27 फरवरी का दिन महाराष्ट्र में काफी अहमियत रखता है, क्योंकि राजनीतिक पार्टियां इस दिन 'मराठी भाषा दिवस' ​​मनाने के लिए भव्य कार्यक्रम आयोजित करके 'मराठी कार्ड' के लिए होड़ में जुटी हैं. 'मराठी भाषा दिवस' के मौके पर सभी दलों ने मराठी अस्मिता को लेकर अपना-अपना दावा पेश किया. ये दिन प्रसिद्ध मराठी कवि और लेखक विष्णु वामन शिरवाडकर, जिन्हें ‘कुसुमाग्रज’ के नाम से जाना जाता है, उनकी 105वीं जयंती के अवसर पर मनाया जाता है.

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राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे दोनों ने अपनी-अपनी पार्टियों की ओर से आयोजित पुस्तक मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, ताकि मराठी गौरव के प्रति अपनी निष्ठा को प्रदर्शित कर सकें. वहीं, महायुति के सहयोगी दलों ने भी राज्य सरकार और विभिन्न संगठनों की ओर से मराठी विरासत से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया.

MNS का दावा- हमारे लिए 'मराठी मानुस' राजनीति से ऊपर

शिवसेना और एनसीपी जैसी क्षेत्रीय पार्टियों में विभाजन और मुंबई के हृदयस्थल से घटती मराठी आबादी पहचान की राजनीति पर फलने-फूलने वाली पार्टियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है. इस बीच, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने दावा किया कि मराठी गौरव और संस्कृति को जीवित रखने में वह सबसे आगे है. मनसे नेता संदीप देशपांडे ने कहा कि हमारे लिए 'मराठी मानुस' राजनीति से ऊपर है, जबकि अन्य दल सिर्फ वोट बैंक की राजनीति करते हैं. हमें वोटों के बंटवारे की परवाह नहीं, हम अपने सिद्धांतों के लिए काम करते रहेंगे.

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उद्धव गुट का शिंदे से सीधा सवाल

वहीं, उद्धव गुट के सांसद और नेता संजय राउत ने 'मराठी भाषा दिवस' के मौके पर ठाणे महानगरपालिका में मराठी स्नातक कर्मचारियों को वेतन वृद्धि से वंचित रखने का मुद्दा उठाया. उन्होंने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए पूछा कि ठाणे जैसे मराठी गढ़ में मराठी युवाओं के साथ अन्याय क्यों हो रहा है, इसका जवाब शिंदे साहब दे. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि सभी कर्मचारियों को उनका बकाया भुगतान किया जाएगा और किसी के साथ अन्याय नहीं होगा.

हर दल खुद को मराठी मानुस का हितैषी साबित करने में लगा

नगर निकाय चुनाव को ध्यान में रखते हुए मराठी अस्मिता को लेकर इस तरह का प्रदर्शन कोई संयोग नहीं है. चुनाव नजदीक आते ही 'मराठी कार्ड' को लेकर यह सियासी मुकाबला और तेज होने की पूरी संभावना है, जहां हर दल खुद को मराठी संस्कृति और मराठी मानुस का सबसे बड़ा हितैषी साबित करने की कोशिश करेगा.

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