महाराष्ट्र में सहकारी बैंकों में अपनी गाढ़ी कमाई के पैसे जमा करना ग्राहकों के लिए एक बार फिर जोखिम भरा साबित हुआ है. महाराष्ट्र के न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक में पैसों की लेन-देन पर रिजर्व बैंक ने रोक लगा दी है. ये खबर आते ही मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में फैली इस बैंक की शाखाओं पर ग्राहकों की भारी भीड़ जमा हो गई. ग्राहक भागे-भागे ब्रांच पहुंचे, जहां उन्हें ये जानकारी मिली कि सिर्फ लॉकर से ही ऑपरेट करने की इजाजत है. लोगों को यकीन नहीं हो रहा कि जिस बैंक में वो कल तक अपना पेट काटकर पैसा जमा करके गए थे, वहां आज उन्हें पैसा निकालने से मना कर दिया गया है. इसी बात से लोग घबराए हुए हैं.
बता दें कि मुंबई स्थित न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक पर RBI ने कड़ी कार्रवाई करते हुए नए लोन देने, नई जमा राशि स्वीकार करने और निकासी पर रोक लगाई है. ये पाबंदियां अगले 6 महीनों तक लागू रहेंगी. RBI ने बैंक की वित्तीय स्थिति और निगरानी संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए यह फैसला लिया है.
बैंक की शाखाओं के बाहर ग्राहकों की भीड़
RBI के इस कदम के बाद मुंबई और ठाणे में बैंक की शाखाओं के बाहर ग्राहकों की भारी भीड़ जमा हो गई. कई खाताधारक अपना पैसा निकालने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने लगे. कुछ जमाकर्ताओं के 40 लाख रुपये से ज्यादा के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) फंसे हुए हैं, जिससे उनकी चिंता और नाराजगी बढ़ गई है. बैंक के बाहर लॉकर एक्सेस के लिए कूपन बांटे जाने की तस्वीरें भी सामने आईं, जिनमें ग्राहकों को अपने लॉकर तक पहुंचने के लिए संघर्ष करते देखा गया. लाइन में खड़े ग्राहकों ने कहा कि हमारी मेहनत का पैसा है, छोटा अकाउंट है, लेकिन हमारे लिए बड़ी चीज है, हमारी मेहनत की पूंजी बैंक में जमा है. एक महिला ने कहा कि अगले महीने मेरी बेटी के यहां फंक्शन है, उसके लिए पैसा चाहिए. हमें इस बारे में कोई मैसेज भी नहीं दिया गया. घर के बाहर बैंक में लाइन लगी देखकर यहां आ गए थे.
हमने पेट काटकर पाई-पाई बचाई
एक महिला ने कहा कि हम पेट काटकर पाई-पाई बचाते हैं. हमें तो ये भी नहीं पता कि कितना मिलेगा और कब मिलेगा. जबकि दूसरी महिला ने कहा कि मैंने अपनी बेटी की शादी के लिए पैसा बचाकर बैंक में रखा था, लेकिन अब कुछ नहीं पता कि आगे क्या होगा? एक बुजुर्ग महिला ने कहा कि हमें पैसे की जरूरत है, पैसा बैंक में है, लेकिन मिल नहीं पा रहा, हम बहुत तकलीफ में हैं. मेरी बेटी के ससुर का आज निधन हो गया है, उसे पैसे की जरूरत है. एक महिला ने कहा कि हमारा बैंक में 45 साल पुराना खाता है. मैंने तो परसो ही 20 हजार रुपए जमा किए थे. हमें पहले बताना चाहिए था कि बैंक बंद होने वाली है, हम एक-एक रुपया जोड़कर सेविंग कर रहे थे, लेकिन अब क्या करेंगे? न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के खिलाफ एक्शन के बाद एक ग्राहक ने कहा कि इससे अच्छा तो घर में पैसा सेफ था, बैंक में पैसा जमा करके हम लोग फंस गए.
खाताधारकों को 5 लाख तक की गारंटी
RBI के नियमों के अनुसार डिपॉजिट इंश्योरेंस स्कीम के तहत पात्र खाताधारकों को अधिकतम 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलेगा. इसके लिए ग्राहकों को बैंक में अपना दावा दर्ज कराना होगा. मार्च 2024 तक बैंक में कुल जमा राशि 2,436 करोड़ रुपये थी.
बैंक अपनी संपत्ति नहीं बेच सकेगा
आरबीआई ने साफ किया है कि बैंक अपनी किसी भी संपत्ति को बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकता. यह आदेश 13 फरवरी 2025 से प्रभावी हो गया है.
पहले भी को-ऑपरेटिव बैंकों पर हुई है कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब आरबीआई ने किसी सहकारी बैंक पर इतनी सख्त कार्रवाई की है. 2019 में पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (PMC Bank) पर भी इसी तरह की पाबंदियां लगाई गई थीं, जब उसके वित्तीय घोटाले और अनियमितताओं का खुलासा हुआ था. बाद में सेंटरम फाइनेंशियल सर्विसेज ने आरबीआई की देखरेख में पीएमसी बैंक का अधिग्रहण किया था.