महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा में किसानों के खुदकुशी के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं. पिछले तीन महीने में यहां पर 517 किसानों ने आत्महत्या कर ली है. शनिवार को अकोला के चांगेफल गांव में खुदकुशी का एक और मामला सामने आया है, जहां 45 साल के एक किसान ने जहर पीकर अपनी जान दे दी. मृतक किसान का नाम किशोर इंगले था. अकोला जिला अस्पताल में अपने भाई की मौत के बाद रोते-बिलखते ज्ञानेश्वर इंगले ने कहा कि किसानी करते हुए भाई ने सारे जतन और कोशिश की लेकिन हार मानकर आत्महत्या कर ली.
ज्ञानेश्वर ने कहा कि बैंक ने कर्ज नहीं दिया इसलिए साहूकार से कर्ज लेकर अपने 3 एकड़ खेत में सोयाबीन की बुवाई की, लेकिन बुवाई करने के बाद बीज ने धोखा दिया, फसल बर्बाद हो गई. फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारते हुए दोबारा बुवाई की, लेकिन ज्यादा बारिश से फसल ना बच सकी. एक तरफ फसल बचाने की जद्दोजहद तो दूसरी ओर इसकी भरपाई करने के लिए मवेशियों के चारे का धंधा शुरू कर दिया.
उन्होंने कहा कि इस धंधे में साहूकार के पैसों का ब्याज इतना था कि वह लौटा नहीं सका. साहूकार बार-बार पैसे मांगते हुए धमकी दे रहा था. जिसके बाद उसने गांव के पास, मंदिर में जहर पीकर खुदकुशी कर ली.
भाई के मुताबिक मृतक किसान ने कर्ज लौटाने की हर संभव कोशिश की. जब बैंक ने उसे फिर से कर्ज नहीं दिया, तो उसने साहूकार का दरवाजा खटकाया. लेकिन उसे क्या पता कि साहूकार के ओने पौने ब्याज में ही उसकी जिंदगी खत्म हो जाएगी. मृतक किसान ने मरने से पहले एक खत लिखा है जिसमें साहूकार और सरकारी सिस्टम को लेकर भी कई बातें लिखी हैं.
हालांकि यह कहानी सिर्फ किशोर इंगले की नहीं है. विदर्भ के कई किसानों ने इस साल लॉकडाउन और कोरोना महामारी के बाद किसी तरह मूंग और सोयाबीन की फसल लगाई थी. लेकिन वह भी 'लिप क्रिंकल वायरस' की वजह से बर्बाद हो रही है. ऐसे में किसान अब बेहद जटिल स्थिति में हैं और संकट से बाहर निकलने के लिए सरकार से गुहार लगा रहे हैं.
एक अन्य किसान विष्णुदास चोरे ने बताया कि इस घटना के बाद पुलिस ने किसान किशोर इंगले के शव का पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है, हालांकि किसान की लिखी चिट्ठी पाने के बाद अब इस मामले में जांच कर अपराध दर्ज करने की बात कही गई है.
विदर्भ में इस साल खरीफ मौसम में किसानों को कहीं का नहीं रखा. पश्चिम विदर्भ में खरीफ के पूरे सीजन में सोयाबीन और मूंग जैसी 50 फीसदी फसल वायरस ने बर्बाद कर दी है. ऐसे में अब सरकार को किसानों पर और ध्यान देने की जरूरत है.