महाराष्ट्र में जारी सियासी घमासान में आज का दिन यानी 5 जुलाई एक अहम दिन साबित हो सकता है. इसकी वजह है दोनों गुटों का शक्ति प्रदर्शन. 5 जुलाई को NCP के दोनों गुटों (अजित और शरद पवार खेमा) की अहम बैठक है. जहां अजित पवार ने सुबह 11 बजे बांद्रा के एमईटी कॉलेज में पार्टी विधायकों और सांसदों की बैठक बुलाई है, तो वहीं शरद पवार ने दोपहर 1 बजे नरीमन पॉइंट पर वाई.बी. चव्हाण केंद्र में सभी विधायकों, सांसदों और जिले से लेकर तालुका स्तर तक सभी रैंक और इकाइयों के पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई है.
ऐसे में आज का दिन इस सियासी घमासान में अहम साबित होने वाला है. दोनों खेमों ने आज की बैठक के लिए पूरी तैयारी कर ली है. माना जा रहा है कि इन बैठकों से ही पार्टी के भविष्य का फैसला होगा. ऐसा इसलिए माना जा रहा है कि एक ही दिन में दोनों गुटों की बैठक है. ऐसे में जिसकी बैठक में ज्यादा संख्याबल हुआ, सीधे तौर पर वो ही दल NCP होने के अपने दावे को पक्का कर सकेगा.
संख्याबल दिखाने के लिहाज से अहम है यह बैठक
बुधवार को होने वाली इस बैठक के लिए एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने आधिकारिक पत्र जारी किया है. साथ ही एनसीपी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले और प्रदेश प्रमुख जयंत पाटिल ने एक वीडियो जारी कर पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं से भारी संख्या में पार्टी बैठक में शामिल होने की अपील की है. नवनियुक्त मुख्य व्हिप जितेंद्र आव्हाड ने सभी विधायकों को आज पार्टी की बैठक में शामिल होने के लिए व्हिप भी जारी किया है.
दूसरी ओर, शरद पवार से अलग होकर अजित पवार के समर्थन वाले गुट एनसीपी के प्रदेश महासचिव शिवाजीराव गर्जे ने भी आज बांद्रा में होने वाली बैठक बुलाने का आधिकारिक पत्र जारी कर दिया है. यह पत्र सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ-साथ जिले से तालुका स्तर तक सभी फ्रंटल इकाइयों के पार्टी प्रतिनिधियों को डिप्टी सीएम अजीत पवार, नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल, राज्य इकाई प्रमुख सुनील तटकरे और मंत्री छगन भुजबल के नेतृत्व में इस बैठक में भाग लेने के लिए संबोधित किया गया है.
शरद पवार के फोटो पर भी तकरार
NCP की सियासत में दोनों धड़े एक दूसरे पर हावी होने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं. मंगलवार शाम शरद पवार ने आजतक से बातचीत में यह तक कहा कि मेरी फोटो मेरी अनुमति से ही इस्तेमाल की जाए. जो मेरे विचारों के खिलाफ है, जिनसे मेरे वैचारिक मतभेद है, वो मेरे तस्वीर का इस्तेमाल ना करें. शरद पवार ने कहा, मेरी तस्वीर किसे इस्तेमाल करनी चाहिए वो मेरा अधिकार है. मैं जिस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष हूं, उस पार्टी के महाराष्ट्र के अध्यक्ष जयंत पाटिल हैं और उनकी ही पार्टी मेरी तस्वीर इस्तेमाल कर सकती है और कोई वो इस्तेमाल ना करे. लिहाजा यह संदेश निश्चित तौर पर अजित खेमे के लिए ही था. क्योंकि बीते दिन सोमवार को अजित पवार ने एक सहमति फॉर्मूला सुझाते हुए स्पष्ट किया था कि शरद पवार हमारे भी राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और अजित गुट भी शरद पवार को ही अपना नेता मानते हुए तस्वीर इस्तेमाल कर रहे हैं.
इस फोटो पॉलिटिक्स पर अजित पवार गुट वाले MLC की बाइट में कहा गया है कि उन्हें, ये नहीं कहना चाहिए कि हमें शरद पवार की फोटो का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. शरद पवार उनकी निजी संपत्ति नहीं हैं.
दोनों गुटों ने शरद पवार को ही माना अपना अध्यक्ष
अजित गुट शुरू से कह रहा है कि शरद पवार हमारे भी नेता हैं. सोमवार को हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब अजित पवार से यह पूछा गया था कि एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन हैं तो इस पर अजित पवार ने कहा कि क्या आप भूल गए हैं कि शरद पवार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. इसके साथ ही उन्होंने शरद पवार के समक्ष सुलह का यह फॉर्मूला रखते हुए कहा था कि हम नहीं चाहते कि पार्टी में दो फाड़ होने की स्थिति में दोबारा चुनाव हो. इसलिए सही यह होगा कि आपसी सहमति से पार्टी में फैसले लिए जाएं. अजित पवार ने चेताते हुए कहा कि अगर आपसी सहमति से फैसले नहीं लिए जाएंगे या आपसी सहमति बनी होगी. तो ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग को फैसले लेने होंगे.
सीएम शिंदे भी अपने विधायकों संग करेंगे बैठक
इस बीच, सीएम एकनाथ शिंदे ने आज शाम 7 बजे अपने आधिकारिक आवास वर्षा बंगले पर शिवसेना के मंत्रियों की बैठक बुलाई है. माना जा रहा है कि इस बैठक में सीएम शिंदे अपने नेताओं से चर्चा करेंगे और उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश करेंगे. सूत्रों का कहना है NCP वित्त और योजना, सहयोग और विपणन, बिजली, सिंचाई विभागों पर जोर दे रही है. ये सभी विभाग उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले महा विकास अघाड़ी (एमवीए) शासन के दौरान NCP के पास ही थे. जबकि सीएम शिंदे के खेमे से शिवसेना के मंत्री एनसीपी को वित्त देने का विरोध कर रहे हैं. एमवीए शासन के दौरान फंड आवंटन में उनके साथ हुए अन्याय का हवाला देते हुए, शिवसेना के मंत्री और विधायक सीएम शिंदे से एनसीपी को वित्त आवंटित करने के फैसले को स्वीकार नहीं करने की मांग कर रहे हैं.
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अपने नेताओं संग पहले भी कर चुके हैं बैठक
खबरें हैं कि NCP के सरकार में शामिल होने से शिवसेना के ही कुछ विधायक नाराज हो गए हैं. उन्हें उम्मीद थी कि वो महाराष्ट्र कैबिनेट में मंत्री बनेंगे. लेकिन एनसीपी के नेताओं के सरकार में शामिल होने से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया. शिंदे गुट के सभी मंत्रियों ने सोमवार सुबह सीएम शिंदे से ठाणे स्थित उनके निजी आवास पर मुलाकात की थी. इस दौरान कैबिनेट मंत्री उदय सामंत, गुलाबराव पाटिल, शंभूराज देसाई के साथ शिंदे गुट के नेता दादा भुसे, संदीपन भुमरे मौजूद थे. सभी ने सीएम शिंदे के साथ एक संक्षिप्त बैठक की जिसमें उन्होंने विभागों के संभावित वितरण पर चर्चा की. इसके साथ ही उन्होंने अजित पवार और उनके वफादारों को सरकार में शामिल करने के फैसले पर भी नाराजगी जताई.
एनसीपी के शिंदे-फडणवीस सरकार में शामिल होने के एक दिन बाद, सीएम शिंदे को ठाणे में अपने निजी आवास पर अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं से मुलाकात करते देखा गया. साथ ही, इस दौरान सीएम शिंदे किसी भी आधिकारिक सरकारी बैठक या कार्यक्रम में भाग लेने के बजाय पूरे दिन ही संगठनात्मक गतिविधियों में ही व्यस्त दिखे थे.
कैसे बदला महाराष्ट्र का पूरा सियासी खेल?
दरअसल 2 जुलाई को दोपहर दो बजे करीब महाराष्ट्र की सियासत में उस वक्त भूचाल आ गया, जब नेता प्रतिपक्ष अजित पवार एक घंटे के भीतर पाला बदलकर राज्य के उपमुख्यमंत्री बन गए. रविवार का दिन था. अजित पवार अपने घर पर साथी विधायकों संग बैठक कर रहे थे. इस बैठक के बाद पवार समर्थक विधायकों के साथ तुरंत राजभवन पहुंचे और फिर डिप्टी सीएम की शपथ ले ली. उनके अलावा 9 एनसीपी विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली जिनमें धर्मराव अत्रम, सुनील वलसाडे, अदिति तटकरे, हसन मुश्रीफ, छगन भुजबल, धन्नी मुंडे, अनिल पाटिल, दिलीप वलसे पाटिल शामिल हैं. इस दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस के साथ सभी मंत्री भी राजभवन मौजूद रहे. इनके अलावा एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल भी राजभवन में मौजूद हैं जिन्हें शरद पवार का करीबी कहा जाता है.
महाराष्ट्र की सियासत में सब कुछ रविवार को इतना तेजी से हुआ कि इसकी भनक लोगों को तब लगी जब अजित पवार अपने समर्थक विधायकों के साथ राजभवन के लिए रवाना हुए. सबसे पहले अजित पवार ने समर्थक विधायकों के साथ अपने आवास पर बैठक की. इसके बाद वह 17 विधायकों के साथ शिंदे सरकार को समर्थन देने के लिए राजभवन रवाना हो हुए. पवार के पहुंचने के बाद राजभवन में सीएम एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस भी पहुंचे जिनके साथ तमाम मंत्री भी मौजूद थे.
उस वक्त इस भतीजे अजित पवार की चाचा शरद पवार से बगावत मानी जा रही थी. लेकिन थोड़ी देर बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि बे बागी नहीं हैं, बल्कि वे ही असली एनसीपी हैं. इस दावे को लेकर सियासत अब तक खिंच रही है. इसी दावे को सच्चाई में बदलने के लिए अजित पवार आज यह बैठक कर अपना संख्याबल दिखाना चाहते हैं.
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शिंदे की राह पर अजित पवार...
यह ठीक वैसा ही सियासी खेल था जैसा कि एक साल पहले शिवसेना में देखने को मिला था. तब एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे से बगावत कर पार्टी पर दावा ठोंका और बाद में कानूनी जंग जीत शिवसेना को अपना बना लिया.
क्या है महाराष्ट्र विधानसभा की वर्तमान स्थिति
महाराष्ट्र की विधानसभा में कुल 288 सदस्य हैं. इसमें किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए 145 विधायकों की जरूरत होती है. अगर सीटों के गणित की बात करें तो बीजेपी के पास 106 विधायक हैं. जबकि पिछले साल एकनाथ शिंदे शिवसेना से बगावत के बाद 40 विधायकों के साथ अलग हो गए थे. उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी और सीएम पद की शपथ ली थी, जबकि देवेंद्र फडणवीस ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी. अब शिंदे गुट के कुल 44 विधायकों का सरकार को समर्थन है. वहीं, राज्य में एनसीपी के पास 53 विधायक हैं. अब दावा किया जा रहा है कि अजित पवार के साथ 40 विधायकों ने सरकार को समर्थन दिया है. इसके साथ ही अन्य 21 विधायकों का भी सरकार को समर्थन है. इसमें 12 निर्दलीय विधायक भी हैं.
क्या है विपक्ष का हाल?
बात विपक्ष की करें तो महाराष्ट्र में कांग्रेस के 44 विधायक हैं, जबकि शिवसेना (UBT) के पास 12 एमएलए हैं. एनसीपी के 13 (शरद पवार गुट) , सपा के 2 विधायक, भारतीय मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का एक, स्वाभिमानी पक्ष पार्टी का एक और पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया का एक विधायक है. इसके साथ ही एक निर्दलीय विधायक विपक्ष में है. जबकि AIMIM के 2 विधायक तटस्थ हैं.