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महाराष्ट्र संकट: क्या सही में विधायकों को अयोग्य घोषित कर सकते हैं डिप्टी स्पीकर? जानिए उनके संवैधानिक अधिकार

महाराष्ट्र संकट के बीच सवाल ये उठता है कि आखिर डिप्टी स्पीकर के संवैधानिक अधिकार क्या होते हैं? क्या डिप्टी स्पीकर किसी विधायक को अयोग्य घोषित कर सकता है?

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सीएम उद्धव ठाकरे और बागी विधायक एकनाथ शिंदे
सीएम उद्धव ठाकरे और बागी विधायक एकनाथ शिंदे
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोर्ट ने दिया था ऐसे मामलों में ट्रिब्यूनल बनाने का सुझाव
  • ट्रिब्यूनल में कोर्ट के रिटायर जज को शामिल करने की बात

महाराष्ट्र संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट की तरफ से शिंदे गुट को बड़ी राहत दी गई है. डिप्टी स्पीकर के बागी विधायकों को दिए गए अयोग्यता नोटिस वाले फैसले पर रोक लगा दी गई है. कोर्ट ने एक तरफ डिप्टी स्पीकर को नोटिस दिया है, वहीं बागी विधायकों को 14 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है. अब सवाल ये उठता है कि आखिर डिप्टी स्पीकर के संवैधानिक अधिकार क्या होते हैं? क्या डिप्टी स्पीकर किसी विधायक को अयोग्य घोषित कर सकता है?

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ये सवाल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान भी उठाया गया. शिंदे गुट की तरफ से कोर्ट में पेश हुए नीरज किशन कॉल ने जोर देकर कहा कि डिप्टी स्पीकर किसी भी विधायक को अयोग्य घोषित नहीं कर सकते क्योंकि उनके खुद को हटाने को लेकर एक प्रस्ताव चल रहा है जिस पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया. इस पर जस्टिस सूर्य कांत ने भी कहा है कि अपने ही मामले में कोई खुद जज की भूमिका नहीं निभा सकता है.

अब यहां ये जानना जरूरी हो जाता है कि संविधान के तहत दोनों स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के पास विधायक अयोग्य घोषित करने की पूरी ताकत रहती है. अनुच्छेद 180 के तहत जब स्पीकर का पद खाली रहता है, तब डिप्टी स्पीकर के पास भी वहीं अधिकार रहते हैं जो एक स्पीकर के पास होते हैं. इसमें विधायकों को अयोग्य घोषित करने का अधिकार भी शामिल है. वहीं डिप्टी स्पीकर को जो हटाने वाली बात चल रही है, उसको लेकर भी संविधान में स्पष्ट बताया गया है.

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अनुच्छेद 179 का क्लॉज सी कहता है कि अगर स्पीकर या डिप्टी स्पीकर को हटाने के लिए कोई प्रस्ताव लाया जाता है और वो बहुमत के साथ विधानसभा से पास हो जाता है, ऐसी स्थिति में स्पीकर या डिप्टी स्पीकर को अपना पद छोड़ना पड़ेगा. वैसे स्पीकर द्वारा विधायकों को अयोग्य घोषित करने वाले फैसले हमेशा से ही विवादों में रहे हैं.

साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में अहम फैसला सुनाया था. कोर्ट ने सुझाव दिया था कि विधायकों को अयोग्य घोषित करने वाले जैसे फैसलों में एक ट्रिब्यूनल का गठन किया जा सकता है. उस ट्रिब्यूनल में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज या फिर हाई कोर्ट रिटायर चीफ जस्टिस को शामिल किया जा सकता है. ऐसी स्थिति में विधायकों को अयोग्य घोषित करने वाले फैसले बिना किसी भेदभाव और विवाद के लिए जा सकेंगे.

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