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विधायकों का छूटा साथ, NCP अध्यक्ष पद पर आंच... 3 दिन में ऐसे नरम पड़े शरद पवार के तेवर

महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल आ गया है. अजित की बगावत के बाद जहां शरद पवार ने पार्टी को फिर से खड़ा करने की बात कही थी, वहीं तीन दिन बाद राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार ने कहा कि अजित मुझसे संपर्क कर सकते थे. इतना ही नहीं, शरद पवार ने कहा कि पीएम ने NCP पर कई कमेंट किए हैं. फिर अगर NCP भ्रष्ट पार्टी है, तो उसे सरकार में क्यों शामिल किया.

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एनसीपी नेता जयंत पाटिल के साथ चर्चा करते शरद पवार (फाइल फोटो)
एनसीपी नेता जयंत पाटिल के साथ चर्चा करते शरद पवार (फाइल फोटो)

सियासत में ऊंट कब-किस करवट बैठेगा, ये कहना मुश्किल है. इसकी बानगी सामने आ रही है महाराष्ट्र में वर्तमान में घट रहे सियासी घटनाक्रम से. करीब 40 साल तक अपने चाचा शरद पवार से वफादारी करने वाले अजित पवार ने पलटी मारी और वह NCP के बागी विधायकों के साथ NDA गठबंधन में शामिल हो गए. अजित की इस बगावत के बाद शरद पवार ने 2 जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि ये पहली बार नहीं है, वह पहले भी ऐसी बगावत देख चुके हैं, और वह फिर से पार्टी खड़ी करके दिखाएंगे. लेकिन तीन दिन बाद ही उनके तेवर नरम पड़ते नजर आ रहे हैं. उन्होंने आज मीटिंग के बाद कहा कि अगर आप (अजित) किसी चीज से खुश नहीं थे तो बातचीत से रास्ता निकालना चाहिए था. मुझसे चर्चा कर सकते थे. 

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शरद पवार ने तीन दिन पहले अजित के इस फैसले पर जमकर आक्रोश जताया. उन्होंने भतीजे की बगावत के बाद कहा था कि 1980 में भी ऐसा ही हुआ था. 5 लोगों के साथ मैंने फिर से शुरुआत की. जिन लोगों ने मुझे छोड़ा उनमें से ज्यादातर हार गए. मुझे लोगों पर विश्वास है और मुझे और भी मजबूती से वापस आने का विश्वास है. मैं पूरे राज्य और देश का दौरा करूंगा. फिर से अपनी पार्टी को खड़ा करूंगा. लेकिन समय बीतने के साथ शरद पवार के तेवर ढीले पड़ गए हैं. ऐसा उनके ताजा बयान से जाहिर हो रहा है.

इस सियासी उठापटक के बाद शरद पवार ने आज पार्टी के नेताओं की मीटिंग बुलाई. इसमें शरद गुट के 13 विधायक पहुंचे. इसमें किरण लहामाटे, अशोक पवार, रोहित पवार, राजेंद्र शिंगणे, अनिल देशमुख, जितेंद्र आव्हाड, संदीप क्षीरसागर, जयंत पाटिल, बालासाहेब पाटिल, सुनील भुसारा, राजेश टोपे, चेतन टोपे और विधायक सुमन पाटिल की जगह उनके बेटे रोहित पाटिल शामिल हुए. इस मीटिंग के बाद शरद के तेवर नरम नजर आए. उन्होंने पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि अजित को अगर कोई भी समस्या थी तो उन्हें मुझसे बात करनी चाहिए थी. उनके मन में कुछ था तो वह मुझसे संपर्क कर सकते थे. हमें सत्ता की भूख नहीं है. हम लोगों के लिए काम करते रहेंगे. इतना ही नहीं, शरद पवार ने कहा कि पीएम ने NCP पर कई कमेंट किए हैं. फिर अगर NCP भ्रष्ट पार्टी है तो उसे सरकार में क्यों शामिल किया. लिहाजा शरद पवार एक ओऱ जहां कह रहे हैं कि अगर कल को कोई खड़ा होकर मुख्य पार्टी होने का दावा करता है तो इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती, वहीं दूसरी ओर कह रहे हैं कि बीजेपी ने NCP को सरकार में शामिल क्यों किया. 

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चाचा ने भतीजे के खिलाफ लिया एक्शन

अजित पवार ने 2 जुलाई को एनसीपी से बगावत कर डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी. इस दौरान उनके साथ छगन भुजबल और हसन मुश्रीफ समेत 8 विधायकों ने भी शिंदे सरकार में मंत्री पद की शपथ ली थी. इसके बाद शरद पवार एक्शन में आ गए. उन्होंने अजित की बगावत के 24 घंटे के भीतर ही अपने कड़े तेवर दिखा दिए. शरद पवार ने एनसीपी से शिवाजीराव गरजे और विजय देशमुख सहित तीन नेताओं को निष्कासित कर दिया गया था. इसके बाद एनसीपी ने प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे को पार्टी से निष्कासित कर दिया. इसके साथ ही अजित पवार सहित नौ बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया. शरद पवार गुट के नेता जयंत पाटिल ने स्पीकर से अजित पवार और 8 मंत्रियों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी.

अब भतीजे की ओर से आया ये रिएक्शन

जब शरद पवार गुट की ओर से एक्शन हुआ तो इसके रिएक्शन में अजित गुट ने भी ताबड़तोड़ एक्शन लिए. महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम ने एनसीपी पर दावा ठोकते हुए जयंत पाटिल को एनसीपी के महाराष्ट्र अध्यक्ष पद से हटाने का ऐलान किया. इसके साथ ही अजित पवार ने सुनील तटकरे को एनसीपी के नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया. उन्होंने कहा कि जयंत पाटिल को तुरंत सुनील तटकरे को कार्यभार सौंप देना चाहिए. साथ ही शरद पवार को एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाने का ऐलान किया. इतना ही नहीं, उन्होंने खुद को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बताया. इतना ही नहीं, अजित ने आज अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि पवार साहब आप 83 साल के हो गए हैं, आप कभी रुकेंगे या नहीं. हम सरकार चला सकते हैं, हम में ताकत है. फिर हमें मौका क्यों नहीं, किसी भी घर में 60 साल के बाद रिटायर होते हैं और आशीर्वाद देने का काम करते हैं, फिर आप ऐसा क्यों नहीं करते?

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अब पार्टी के नाम और निशान की लड़ाई

NCP के नाम और निशान पर दावे को लेकर अजित और शरद पवार दोनों गुट चुनाव आयोग पहुंच गए हैं. पहले शरद पवार गुट ने अर्जी लगाई थी. इसमें कहा गया कि कोई भी एनसीपी पर अपने आधिपत्य का दावा आयोग के सामने करे तो आयोग शरद पवार पक्ष को भी जरूर सुने. इसके कुछ घंटों बाद अजित पवार गुट ने चालीस से अधिक विधायकों के शपथ पत्र के साथ पार्टी पर दावा ठोका. अजित पवार गुट ने चालीस से ज्यादा विधायकों/सांसदों और MLC के हलफनामे के साथ पार्टी पर अपना दावा किया है. हालांकि, आज उनकी मीटिंग में 31 विधायक ही पहुंचे थे. वहीं शरद गुट का दावा है कि उनके पास 13 विधायकों का समर्थन है. हालांकि इस संख्या बल को लेकर दोनों गुटों की ओर से अलग अलग दावे किए जा रहे हैं, हालांकि इसे लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है. इसके साथ ही शरद पवार गुट ने आयोग से गुहार लगाई कि कोई भी अगर एनसीपी पर अपने अधिकार और नाम निशान पर दावा करे तो आयोग उनकी दलीलें भी सुने. 

 

 

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