मेट्रो बनाएं, पेड़ भी लगाएं
इंडिया टुडे से बात करते हुए एक्टिविस्ट जोरी भाथेना ने कहा कि MMRCL के अधिकारियों का घटिया काम देखकर वह स्तब्ध रह गए हैं. उन्होंने कहा, 'मेट्रो के अधिकारियों द्वारा लगाए गए पेड़ों की लंबी-लंबी कतार देखकर बहुत दुख हुआ, सारे पेड़ मरने लगे हैं, ये बेहद दुखद है कि हमारी सरकार के पास मेट्रो बनाने के लिए सबसे बढ़िया तकनीक है, लेकिन इन पेड़ों को बचाने के लिए हमारे पास कोई तकनीक है. ऐसा साथ-साथ हो सकता है कि हम पेड़ों को भी बचाएं और मेट्रो को भी बनाते चलें, जरूरी नहीं है कि एक को बचाने के लिए, बनाने के लिए दूसरे को नष्ट करना पड़े, ये बहुत ही निराशाजनक है कि हमारी सरकार पेड़ों को लेकर बहुत उदासीन है.'
'684 पेड़ मर गए'
बता दें कि मुंबई के अलग अलग स्थानों में एक कमेटी पेडों का मुआयना कर रही है. इस कमेटी में हाईकोर्ट के दो अधिकारी, MMRCL के अधिकारी और याचिकाकर्ता शामिल हैं. कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक आरे जंगल से कुल 1066 पेड़ अलग अलग स्थानों में लगाए गए थे, इसमें से 684 पेड़ सूख गए हैं. बता दें कि कोलाबा से अंधेरी तक जाने वाले मेट्रो-3 प्रोजेक्ट के लिए MMRCL ने आरे के जंगलों से 1500 पेड़ों को उखाड़ा गया था. ये पेड़ मेट्रो निर्माण की राह में बाधा थे. इन पेड़ों को शहर के अलग-अलग स्थानों में लगाया गया था.
MMRCL ने औपचारिकता निभाई
वाचमैन फाउंडेशन नाम की संस्थान के चेयरमैन गॉडफ्रे पामेंटा ने बताया कि आरे में MMRCL ने जिन पेड़ों को लगाया गया था उनकी देखभाल ठीक तरीके से नहीं की गई थी. उन्होंने कहा कि पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने में किसी विशेषज्ञ की सलाह नहीं ली गई थी. इसे बस भगवान भरोसे छोड़ दिया गया था. कुछ जगहों में यूं ही पत्थर टिका कर छोड़ दिया गया था. MMRCL पेड़ों की देखभाल करने के बजाय सिर्फ खानापूर्ति करता दिखा. इस मामले में MMRCL की प्रतिक्रिया अबतक नहीं आ पाई है.