मुंबई पुलिस ने राजस्थान के जयपुर से दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है. बताया जा रहा है कि दोनों एक ऐसे रैकेट का हिस्सा हैं जो नौकरी देने के नाम पर लोगों को ठगने का काम करता है. यह मामला तब प्रकाश में आया जब 23 वर्षीय एक बेरोजगार लड़की को पैसे कमाने के लिए काम और प्रोजेक्ट देने के नाम पर ठगा गया. पीड़िता से कहा गया कि वह छह पेज टाइप करने के काम के लिए प्रतिदिन लगभग 600 रुपये कमा सकती है.
राजस्थान में गिरफ्तारी करने वाली टीम का नेतृत्व करने वाले डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन के सहायक पुलिस निरीक्षक दीघे (साइबर डिटेक्शन अधिकारी) ने बताया कि आरोपियों का टारगेट इंस्टाग्राम के माध्यम से संपर्क करके बेखबर पीड़ितों, ज्यादातर बेरोजगार व्यक्तियों को नौकरी देने का झांसा देना था. वे या तो उन्हें मैसेज करते या विज्ञापन देते. उन्हें नौकरी का वादा किया जाता और बाद में धोखा दिया जाता. यहां पीड़ित को प्रोजेक्ट फीस, फिर आवेदन शुल्क का भुगतान करने के लिए राजी किया गया और बाद में बताया गया कि उसे 84,000 बोनस मिलेगा. लेकिन बोनस के बारे में बताए जाने से पहले, उसे जीएसटी के लिए कुछ हज़ार रुपये देने के लिए कहा गया.
इससे उसके मन में संदेह पैदा हुआ और जब उसने अपने पैसे वापस मांगे, तो उसका नंबर ब्लॉक कर दिया गया. तब तक वह गूगल पे के माध्यम से विभिन्न लेनदेन में तेईस हज़ार का भुगतान कर चुकी थी. गिरफ्तार किए गए दोनों लोगों की पहचान मास्टरमाइंड मोहन चौधरी और मुकेश मेहरा के रूप में हुई है. मेहरा ने अपने खाते में पैसे प्राप्त किए और वह लाभार्थी है.
पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी पिछले दो सालों से इस काम में लगे हुए हैं. साइबर अधिकारी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भी इसी तरह के अपराधों में मोहन के लिंक की जांच कर रहे हैं. अपराध में इस्तेमाल किए गए फोन और सिम कार्ड जब्त कर लिए गए हैं. दोनों पर आईपीसी की धारा 419 (प्रतिरूपण) और 420 (धोखाधड़ी) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है और उन्हें 29 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.
(रिपोर्ट: देव कोटक)