मुंबई के एक सैलून में काम करने वाले दो कर्मचारियों ने साल 2018 में अपने ही साथी की हत्या कर दी थी, इस मामले में यहां की सेशन कोर्ट ने दोनों पूर्व कर्मचारियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. हालांकि मृतक कृति व्यास का शव अभी तक नहीं मिला है.
एडिशनल सेशन जज एमजी देशपांडे ने सोमवार को सिद्धेश ताम्हणकर और उनकी महिला सहकर्मी को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 201 (अपराध के सबूतों को गायब करना) समेत कई धाराओं में दोषी ठहराया था. उसके बाद मंगलवार को दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, दोषी पाए गए दोनों पूर्व कर्मचारी सैलून में अकाउंट एग्जीक्यूटिव और अकाउंट मैनेजर के रूप में काम करते थे और मृतक कृति व्यास को रिपोर्ट करते थे, जोकि फाइनेंस मैनेजर के तौर पर काम कर रही थी. आरोप है कि व्यास की हत्या इसलिए कर दी गई क्योंकि उन्होंने एक आरोपी को ठीक से काम नहीं करने के लिए मेमो जारी किया था. दोनों को डर था कि उनका अफेयर सबके सामने आ सकता है और नौकरी भी जा सकती है. व्यास को आखिरी बार आरोपी के साथ ही देखा गया था.
मार्च, 2018 में लापता हुई थी मैनेजर
पुलिस ने एक आरोपी की कार में मिले खून के सैंपल का डीएनए टेस्ट कराने के बाद मामले का खुलासा किया. अधिकारी ने कहा था कि वाहन का इस्तेमाल कथित तौर पर अपराध में किया गया था. व्यास 16 मार्च, 2018 को लापता हो गईं और उनके परिवार ने डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने से पहले उनका पता लगाने के लिए ग्रांट रोड और मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले. परिवार ने पुलिस को बताया था कि व्यास अंधेरी में सैलून के लिए ग्रांट रोड से सुबह 9.11 बजे विरार जाने वाली उपनगरीय ट्रेन में चढ़ती थी. बाद में यह मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया था, इसमें दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी.