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उद्धव के साथ सुलह के लिए तैयार है शिंदे की शिवसेना? मंत्री शिरसाट ने दिए बड़े संकेत

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और शिवसेना के प्रवक्ता संजय शिरसाट ने कहा कि आज भी उनके और उनकी पार्टी के कई सहयोगियों के सेना (UBT) नेताओं के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध हैं. मंत्री ने कहा कि दोनों दलों के नेता अब भी एक- दूसरे से गर्मजोशी से मिलते हैं.

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संजय शिरसाट (फाइल फटो)
संजय शिरसाट (फाइल फटो)

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने शनिवार को कहा कि वह अपनी पार्टी और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिव सेना (UBT) के बीच सुलह कराने के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले दिलों का एक होना जरूरी है. एक चैनल को दिए साक्षात्कार में शिरसाट ने कहा कि वह बाल ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना में हुई टूट से दुखी हैं, जिसका नेतृत्व अब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कर रहे हैं.

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न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक शिवसेना के प्रवक्ता संजय शिरसाट ने कहा कि आज भी उनके और उनकी पार्टी के कई सहयोगियों के सेना (UBT) नेताओं के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध हैं.

'बाद में संबंधों को सुधारना कठिन होगा'
यह पूछे जाने पर कि अगर मौका मिले तो क्या वह मेल-मिलाप की दिशा में किसी भी प्रयास करने के लिए तैयार हैं, शिरसाट ने कहा मैं मिलाना चाहूंगा, लेकिन पहले दिलों का मिलना जरूरी है. मंत्री ने कहा कि दोनों दलों के नेता अब भी एक- दूसरे से गर्मजोशी से मिलते हैं. शिरसाट ने कहा कि दोनों के बीच दूरियां इतनी बढ़ गई हैं कि अगर इसे अभी नहीं पाटा गया तो बाद में संबंधों को सुधारना मुश्किल होगा.

2022 में विभाजित हुई थी पार्टी

शिरसाट ने शिव सेना (UBT) के नेताओं के हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि हम एक-दूसरे की गलतियों को माफ कर सकते हैं. अगर आप सोचते हैं कि आप एक-दूसरे का अपमान करके एक साथ आ सकते हैं, तो यह संभव नहीं है.  मूल शिवसेना, जो उस समय उद्धव ठाकरे के पास थी, जून 2022 में विभाजित हो गई. 

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दरअसल एकनाथ शिंदे पार्टी समर्थकों के साथ चले गए और महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनने के लिए भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया था. इसके बाद, उन्हें पार्टी का नाम और उसका 'धनुष और तीर' निशान मिला. विभाजन के बाद से ही सेना के दोनों गुट एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं.

विधानसभा चुनाव में महायुति को जीत मिली

पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में, भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन में भागीदार शिंदे सेना ने राज्य की 288 सीटों में से 57 सीटें जीती थीं.  इसके विपरीत, महा विकास अघाड़ी के तहत कांग्रेस और एनसीपी (एसपी) के साथ गठबंधन करने वाली सेना (यूबीटी) को केवल 20 सीटें मिलीं. कुल मिलाकर, महायुति ने 230 सीटें जीतीं, जबकि एमवीए को सिर्फ 46 सीटें मिलीं.

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