महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के नेताओं की नजर अब सदन के नेता प्रतिपक्ष कै पद पर बनी हुई है. विशेष रूप से कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता पद पर नजर गड़ाए हुए हैं.
यही नहीं, विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी ने विपक्ष के नेता के साथ-साथ डिप्टी स्पीकर के पद की मांग की है. इस पर निर्णय लेने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष के पास है. विधानसभा अध्यक्ष के पद पर बीजेपी विधायक और पूर्व स्पीकर राहुल नार्वेकर निर्विरोध चुने गए हैं.
नाना पटोले ने दिया अतीत का उदाहरण
हालांकि, कांग्रेस अभी भी विपक्ष के नेता पद पर अपना दावा नहीं छोड़ रही है. महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि उन्हें अभी एमवीए सहयोगियों के साथ चर्चा करनी है और विपक्ष के नेता के चेहरे पर फैसला करना है. उन्होंने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जब कांग्रेस ने 220 सीटें जीती थीं, फिर भी उसने विपक्ष को नेता प्रतिपक्ष का पद दिया था.
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नाना पटोले ने कहा कि अब यह सरकार पर निर्भर है कि वह हमारी मांग को स्वीकार करे या अस्वीकार करे. कांग्रेस से नाना पटोले और विजय वडेट्टीवार नेता प्रतिपक्ष पद के लिए सबसे आगे हैं.
क्या कहता है नियम
वहीं शिवसेना यूबीटी के नेता भास्कर जाधव सदन के नेता चुने गए हैं और सुनील प्रभु मुख्य सचेतक बनाए गए हैं. नियमों के मुताबिक, 288 सीटों में से 10 प्रतिशत यानि 29 सीटें पाने वाली पार्टी विपक्ष के नेता पद का दावा कर सकती है. वर्तमान परिस्थितियों को देखा जाए तो विधानमंडल के नियमों के अनुसार, एमवीए की सभी पार्टियां इस समय इस आंकड़े से पीछे हैं.
किसी के पास भी जरूरी आंकड़ा नहीं
संख्या के अनुसार शिवसेना (यूबीटी) 20 विधायकों के साथ सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के रूप में उभरी है, उसके बाद कांग्रेस के पास 16 और एनसीपी शरद पवार समूह के पास 10 विधायक हैं.
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